प्रदेश सरकार कर्मचारियों व पैंशनर्ज को वित्तीय लाभ देने में पूरी तरह से नाकाम रही – भाजपा
BHT news,ऊना:- प्रदेश सरकार कर्मचारियों व पैंशनर्ज को वित्तीय लाभ देने में पूरी तरह से नाकाम रही है। जिससे कर्मचारियों व पैंशनर्ज में सरकार के प्रति गहरा रोष व्याप्त है। यह बात भाजपा पूर्व कर्मचारी प्रकोष्ठ के संयोजक राजीव वशिष्ट, जिला परिषद सदस्य अशोक धीमान,यशपाल रायजादा, शिव मैहन, अजय पराशर, ठाकुर श्रीचंद ने कहीं। केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की 58 प्रतिशत की किश्त दे दी है। साथ में आठवां वेतन आयोग भी बिठा दिया है। जबकि हिमाचल सरकार ने अपने कर्मचारियों व पैंशनर्ज को अभी तक 45 प्रतिशत महंगाई भत्ते की किस्त दी है। कर्मचारियों व पैंशनर्ज का अभी भी 13 प्रतिशत महंगाई भत्ता देने में नाकाम रही है। कर्मचारियों व पैंशनर्ज की महंगाई भत्तों की किस्तों का एरियर, रिवाइज्ड पे स्केल का एरियर, कम्युटेशन, ग्रेच्युटी तथा चिकित्सा बिलों का अभी तक भुगतान नहीं हो पाया है। इससे कर्मचारियों व पैंशनर्ज में काफी रोष पाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में पहले मुख्यमंत्री सुखविंद्र सुक्खू आए है, जो कर्मचारियों, पैंशनर्ज व अन्य वर्गो के साथ झूठे वायदे करके सरकार सत्ता में आई थी। आज तक इस सरकार ने अपनी कोई भी गारंटी पूरी नहीं की है। जबकि केंद्र सरकार समय-समय पर प्रदेश सरकार को हर तरह की सहायता दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने महिलाओं को 1500 रुपए देने का वायदा किया था, लेकिन सरकार बने 3 साल हो चुके है एक भी महिला के खाते में 15 रुपए तक नहीं आए। इसके अलावा प्रदेश के लोगोंं के लिए भाजपा सरकार में बेहतर उपचार मुहैया करवाने के लिए हिमकेयर योजना चलाई गई थी, प्रदेश सरकार ने उसे भी बंद कर दिया। इसके अलावा बिजली दरों में बढ़ोतरी कर दी और स्टांप डयूटी में भारी वृद्धि कर लोगों पर महंगाई की मार मारी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार हर वर्ग को राहत दे रही है। पहले जहां जीएसटी दरों में कमी की गई थी। वहीं अब मनरेगा योजना में संशोधन किया गया है। अब मनरेगा योजना के तहत 100 दिन के बजाय 125 दिन का रोजगार ग्रामीणों का उपलब्ध हो पाएगा। प्रदेश सरकार इसके उल्ट काम कर रही है। प्रदेश सरकार लोगों को राहत देने के बजाय तंग करने का काम हर रही है। अभी हाल ही में सिमेेंट के दाम में बढ़ोतरी कर दी गई। बसों के किराये में बढ़ोतरी की गई। गरीब जनता को दो वक्त की रोटी के लिए जूझना पड़ रहा है। अगर प्रदेश सरकार का ऐसा ही हाल रहा तो कर्मचारियों व पैंशनर्ज आने वाले पंचायत चुनावों में इनका हिसाब पूरा कर देंगे।



























