पुस्तकालय – ज्ञान का भंडार
किसी कसबे के बीचो-बीच एक पुस्तकालय था जो की खाली रहता था।पहले वहां बहुत चहल – पहल रहती थी क्योंकि बच्चे व बड़े वहां पर अक्सर किताबें पढ़ने जाते रहते थे व घंटो तक किताबें के साथ अपना समय बिताते थे पर अब वह समय चला गया है ।अब पुस्तकालय में अलमारियों व किताबों में धूल ही रह गई है । जब से इंटरनेट से किताबें मोबाइल में ही पढ़ लेने का ट्रेंड शुरू हुआ है ,तभी से पुस्तकालय की यह हालत है । एक दिन राहुल व उसके कुछ दोस्त इस पुस्तकालय के पास खेल रहे थे । राहुल खेलते – खेलते इस पुस्तकालय के अंदर आ जाता है ।इतनी सारी किताबें देखकर वह बहुत खुश हो जाता है । इसके बाद वह वही बैठकर एक किताब पढ़ने लगता है ।जब उसके दोस्त उसे ढूंढते हुए वहां जाते हैं तब वे भी अलग-अलग किताबों को देखने लगते हैं । किताबें पढ़ते – पढ़ते व चित्र देखते-देखते वे खेलना भूल जाते हैं । अगले दिन राहुल अपने और दोस्तों को भी इस पुस्तकालय के बारे में बताता है । बच्चों ने मजाक में वहां जाना शुरू कर दिया लेकिन किताबों में उन्हें ऐसी नई कहानियां मिलने लगी जो उन्हें इंटरनेट में नहीं मिलती थी। उन्हें किताबें पढ़ना अच्छा लगने लगा । धीरे-धीरे इन बच्चों को देखकर और बच्चे व कुछ बड़े भी वहां आने लगे । सभी को यह महसूस हुआ की किताबें के साथ हमें जो अपनापन मिलता है वह मोबाइल पर किताबें पढ़ने पर बिल्कुल नहीं मिलता । आखिर में उस पुस्तकालय की चहल-पहल राहुल व उसके दोस्तों की वजह से लौट आई ।
शिक्षा – चाहे टेक्नोलॉजी कितनी ही आगे बढ़ जाए , पर किताबें ही सदैव हमें अपनापन देगी व हमारी सच्ची मित्र रहेगी ।
नाम – सुगंधी चोपड़ा
कक्षा – नवमी
स्कूल का नाम – डी० ए० वी० सेंटेनरी पब्लिक स्कूल ऊना
































