प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विजय डोगरा ने कहा विधायकों के लिए झंडियों की व्यवस्था को लेकर सरकार की चिंता यह दिखाती है कि सरकार को आम आदमी की तकलीफों से कोई सरोकार नहीं
जसवाल ( ऊना ) एक तो प्रदेश में महामारी का प्रकोप है और दूसरे महंगाई ने आम आदमी की नाक में दम कर दिया है। बाजार के हालात सबके सामने हैं। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम आसमान छू रहे हैं। अब महामारी के इस दौर में प्रदेश सरकार राशन डिपुओं में मिलने वाले सामान के दामों में लगातार बढ़ोतरी करके मध्यम और निम्न वर्ग के लोगों के लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना मुश्किल कर रही है। यह बात प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता विजय डोगरा ने वीरवार को यहां जारी एक बयान में कही। डोगरा ने कहा कि कोविड काल में लोगों को राहत पहुंचाने की बजाए प्रदेश सरकार उनपर महंगाई का अतिरिक्त बोझ डालने पर आमादा है। यहां तक कि सरकारी डिपुओं में मिलने वाले राशन की दरों में दो से अढ़ाई गुणा वृद्धि कर दी गई है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन साल में भाजपा के इस शासन के दौरान सरकारी डिपुओं के राशन के दाम बढ़े हैं, जबकि इससे पहले न तो किसी कांग्रेस की सरकार ने और न भाजपा की सरकार ने आम आदमी पर इस तरह का बोझ डाला है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पूर्व की कांग्रेस सरकार और पूर्व में रहीं भाजपा की सरकारों के समय में डिपुओं में मिलने वाले राशन की दरों को लेकर प्रदेश की वर्तमान सरकार को श्वेत पत्र जारी करना चाहिए, ताकि प्रदेश की जनता यह जान सके कि कौन सी सरकार आम आदमी के हित में रही हैं।
डोगरा ने कहा कि कोविड बीमारी से निपटने में भी हिमाचल प्रदेश फिसड्डी साबित हो रहा है। पूरे राष्ट्र में कोविड से होने वाली मौतों की दर से कहीं ज्यादा हिमाचल प्रदेश में मृत्यु दर का आंकड़ा है। कोविड की तीसरी लहर आने को है, लेकिन अभी तक हिमाचल में दूसरी लहर से निपटने के इंतजाम भी पूरे नहीं हो पाए हैं। यह प्रदेश सरकार की विफलता को दर्शाता है। डोगरा ने आरोप लगाया कि सरकार के नुमाइंदे कोरोना से निपटने की बजाए अपनी विशेष पहचान को लेकर चिंतित हैं। विधायकों के लिए झंडियों की व्यवस्था को लेकर सरकार की चिंता यह दिखाती है कि सरकार को आम आदमी की तकलीफों से कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री सहित कांग्रेस के कई विधायकों ने झंडी लगाने से साफ इनकार करके साबित कर दिया है कि कांग्रेस के लिए विशेष पहचान कोई मायने नहीं रखती। यह दौर महामारी से निपटने का है न कि विधायकों की विशेष पहचान बनाने की चिंता करने का।

































