सरकार के उपेक्षापूर्ण व्यवहार के खिलाफ ग्रामीण सफाई कर्मचारी 18 अप्रैल को प्रदेश भर में करेंगे काले बिल्ले लगाओ आंदोलन
करनाल, आशुतोष गौतम ( 16 अप्रैल ) ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन हरियाणा हरियाणा सरकार के उपेक्षापूर्ण रुख के खिलाफ सफाई कर्मचारियों की मांगों को लेकर राज्य भर में डियुटी के दौरान 18 अप्रैल को काले बिल्ले लगाओ आंदोलन करने का निर्णय लिया है। इस अभियान के दौरान प्रदेश के सभी 11 हजार ग्रामीण सफाई कर्मचारी अपनी बाजू व गले में काली पट्टी बांधकर तथा अपनी जेबों पर काले बिल्ले लगाकर लोकडाउन का पालन करते हुए अपनी मांगों को मनवाने के लिए आंदोलन करेंगे। ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन के प्रदेश महासचिव विनोद कुमार, जिला प्रधान जोगिंदर, सीटू जिला प्रधान सतपाल सैनी व सीटू जिला सचिव जगपाल ने एक सयुंक्त प्रेसब्यान जारी करते हुए बताया की ग्रामीण सफाई कर्मचारियों की जायज समस्याओं को लेकर सरकार के पास कोरोना अवधि के दौरान 4 बार पत्र व ज्ञापन भेजा जा चुका है। लेकिन सरकार कर्मचारियों की बात सुनने को तैयार नही है। उन्होंने कहा की कोरोना माहामारी के खिलाफ लड़ाई में अपनी जान की परवाह किये बिना बेहतर भूमिका अदा करने वाले 11 हजार ग्रामीण सफाई कर्मचारियों को ना ठीक से सुरक्षा किट दी जा रही है और ना ही मैडिकल चैकअप किया जा रहा है। सरकार ने स्वास्थ्य कर्मचारियों की तरह कोरोना अवधि का डबल वेतन देने से भी इन कर्मियों को वंचित ही रखा है जो नाइंसाफी का ही परिणाम है। ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन हरियाणा के नेताओं ने कहा की प्रदेश सरकार सफाई कर्मियों को कोरोना सैनिक होने का तो ढिंढोरा पीट रही है। भाजपा विधायक इन सफाई कर्मचारियों को फूल मालाएं पहनाने का भी नाटक कर रहे हैं लेकिन स्थाई करने के लिए कोई कदम नही उठाया जा रहा। जबकि उतर प्रदेश के एक लाख 8 हजार 850 ग्रामीण सफाई कर्मचारियों को 2008 से रेगुलर कर्मचारी का दर्जा मिल चुका है। आठ माह बीत जाने के बाद भी इन कर्मचारियों को पीएफ के दायरे में कवर करने के सरकार के आदेश की खुद पंचायत विभाग के अधिकारी ही धज्जियां उड़ा रहे हैं।
ये हंै ग्रामीण सफाई कर्मियों की मुख्य मांगें: स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की तरह ग्रामीण सफाई कर्मियों को भी कोरोना अवधि का डबल वेतन दिया जाए। बीडीपीओ कार्यालय द्वारा खरीदकर मास्क, दस्ताने, जूते, सेनेटाइजर, जाकेट आदि पर्याप्त मात्रा में सभी सुरक्षा उपकरण दिए जाएं। कोरोना अवधि के दौरान किसी भी ग्रामीण सफाई कर्मचारी की मौत होने पर उसके परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा राशी दी जाए। सभी 11 हजार सफाई कर्मियों को रेगुलर किया जाए तथा रेगुलर करने के लिए विशेष पॉलिसी बनाई जाए। चार सितम्बर 2019 को जारी पत्र को लागू करते हुए सभी कर्मियों व सरकार का पीएफ अंश बोर्ड के पास जमा करवाया जाए तथा ईएसआई में कवर किया जाए। बकाया वेतन,वर्दी भत्ते का तुरन्त भुगतान किया करवाया जाय व बजट होने के बावजूद समय पर वेतन ना देने वाले अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्यवाही की जाए। गांवों में ठीकरी पहरों में सफाई कर्मचारियों की जबरदस्ती डियूटी लगाकर करवाई जा रही बेगार पर रोक तुरन्त रोक लगाई जाए। सभी सफाई कर्मचारियों का मेडिकल चैकअप करते हुए निशुल्क चिकित्सा का प्रदान की जाए। अपने गांव से बाहर काम करने के लिए जाने वाले सफाई कर्मचारियों को यात्रा व खाना भत्ता दिया जाए।

































