सरकारी तंत्र की मिलीभगत से उद्योग धंधे हुए गायब, औद्योगिक जमीनो पर बने कर्मशियल कम्पलैक्स
रणधीर जसवाल, शिमला ( 29 अक्तूबर) हिमाचल प्रदेश में जयराम सरकार की पहली ग्लोबल इन्वेस्टर मीट को अब कम ही समय बचा है तथा 7 और 8 नवंबर को धर्मशाला में होने वाली इन्वेस्टर मीट से पहले सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर मीट का उद्घाटन देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे।

मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर द्वारा निवेशकों को लुभाने के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं और कई लुभावनी घोषणाएं भी की जा रही हैं। जानकारों की माने तो हिमाचल सरकार की औधोगिक नीति से प्रदेश के लोगों को क्या मिला यह भी सोचने का विषय है। आम जनता को प्रदूषण के खतरनाक थपेड़े मिले हैं और युवाओं को बेरोजगार हो कर इधर चधर धक्के खाने को मजबूर होना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि प्रदेश सरकार को इस मामले मेंं भी गंभीरता से विचाार करना चाहिए कि जो सुविधाएं निवेशकोंं को सरकार प्रदान करने जा रही है उनको वह लूट कर ना चलते बने और कुछ सालों बाद फिर से प्रदेश के हाथ इस मामले में खाली ही रह जाएं। लोगोंं का कहना है कि प्रदेश की जय राम सरकार कोई ठोस औद्योगिक नीति बनाए जो लंब समय तक प्रदेेेश के हितों की रक्षा कर सके।
औद्योगिक नीति की खामी से परवाणू में गोदाम व दुकानों मे तब्दील हुए औद्योगिक प्लॉट
औधोगिक नीति के तेहत ऐसे भी मामले भारी तदाद में हैं जिन निवेशकों को सस्ती कीमतों पर हिमाचली जमीने सरकार ने दी। उक्त जमीन पर कुछ वर्ष उद्योग तो लगे और सब्सिडी का भी फायदा उठाया गया , लेकिन सरकारी तंत्र की मिलीभगत से औद्योगिक जमीनों पर उद्योग धंधे तो गायब हो गए हैं और वहां पर कर्मशियल कम्पलैक्स बन गए हैं। इनका प्रयोग कंपनियों के गोदाम बनाकर तथा बड़ी – बड़ी दुकाने के रूप होने लगा है। इससे मौटी कमाई किराए के रूप में निवेशक को हो रही है ।वहीं हिमाचल सरकार की औधोगिक नीति की खामी के चलते निवेशकों को तो भारी लाभ हुआ है लेकिन प्रदेश सरकार को टेक्स का भारी भरकम घाटा हुआ है वहीं हिमाचल के लाखों युवाओं को रोजगार से भी दूर होना पड़ा है। औद्योगिक क्षेत्र परवाणू में ऐसे कई मामले हैं यहां सरकार की औद्योगिक नीति की पौल खुलती दिखाई दे रही है वहीं बीबीएन औद्योगिक क्षेत्र सहित दूसरे क्षेत्रों का रिकॉर्ड खंगाला जाए तो कई चौकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।