सीखने व सिखाने वाले दोनों को प्रोत्साहन राशि प्रदान करेगी प्रदेश सरकार
जसवाल, ऊना ( 6 जनवरी ) हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक व शिल्प कला को संरक्षित करने के लक्ष्य के साथ हिमाचल प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री ग्राम कौशल योजना आरंभ कर रही है। इस योजना के माध्यम से युवाओं को पारंपरिक कलाओं को सीखने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे कारीगरों का क्षमता निर्माण होगा। कारीगरों को अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में भी सहयोग दिया जाएगा। इसके लिए मेले व उत्सवों में उनके उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके अलावा शिल्पकारों को बाजार से जोड़ने के लिए शिल्प हाट भी लगाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने ग्राम कौशल योजना की घोषणा अपने बजट भाषण में की थी, ताकि ग्रामीण परिवेश के युवाओं का कौशल विकास करने के साथ-साथ उन्हें स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हो सके। आज हाथ से बनी पारंपरिक वस्तुओं की अच्छी मांग है, इसीलिए प्रदेश सरकार इस योजना को प्रचारित कर अधिक से अधिक युवाओं को पारंपरिक कलाओं में कुशल बनाने का प्रयास कर रही है।
सीखने व सिखाने वाले को मिलेंगे पैसे
ग्राम कौशल योजना के तहत सीखने व सिखाने वालों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। जहां प्रशिक्षु को 3 हजार रुपए मिलेंगे वहीं मुख्य प्रशिक्षक को 1500 रुपए की राशि प्रति माह प्रति प्रशिक्षु प्रदान की जाएगी। मुख्य प्रशिक्षक अधिकतम 5 प्रशिक्षुओं के बैच को ही प्रशिक्षित कर सकता है। शिल्प कला के आधार पर प्रशिक्षण अवधि तय की जाएगी। यह अवधि कम से कम 3 माह व अधिकतम 1 वर्ष होगी। एक माह में कम से कम 20 दिन तथा एक दिन में कम से कम 5 घंटे प्रशिक्षण प्रदान करना अनिवार्य होगा। कोर्स पूरा करने के बाद प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा।
कैसे होगा मुख्य प्रशिक्षक नियुक्त
भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग, हिमाचल प्रदेश हस्तशिल्प तथा हथकरघा निगम, पर्यटन विभाग, उद्योग विभाग अथवा किसी अन्य सरकारी एजेंसी द्वारा प्रमाणित मुख्य प्रशिक्षक को इस योजना के अंतर्गत मुख्य प्रशिक्षक नियुक्त किया जा सकता है। इसके अलावा जिला के संबंधित उपायुक्त भी मुख्य प्रशिक्षक नियुक्त कर सकते हैं।
इन कलाओं का मिलेगा प्रशिक्षण
मुख्यमंत्री ग्राम कौशल योजना के अतंर्गत बुनाई, कढ़ाई, कताई, लकड़ी व धातु का काम, चित्रकला, थंगका चित्रकला, टोकरी बनाना व मिट्टी के बर्तन बनाना आदि शामिल हैं। समय-समय पर इस सूची में बदलाव किया जा सकता है। इस योजना के अतंर्गत प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए संबंधित खंड विकास अधिकारी या जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है।
स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे

मुख्यमंत्री ग्राम कौशल योजना के बारे में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि विभिन्न कौशल योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है, लेकिन अभी भी पंरपरागत शिल्पी तथा दस्तकार किसी भी योजना के दायरे में नहीं आते। इसी कमी को पूरा करने के उद्देश्य से यह योजना तैयार की गई है। प्रदेश में अनेक कलाएं एवं शिल्प हैं, जिन पर आधारित उत्पादों की व्यापक व्यावसायिक संभावनाएं हैं। यह योजना गांव के युवाओं के लिए आजीविका के अवसर उत्पन्न करेगी तथा परंपरागत शिल्प कला को जीवित रखने में मददगार सिद्ध होगी।































