विश्व स्तनपान जागरूकता सप्ताह पर कंवर मल्टी स्पैशियलिटी अस्पताल ऊना में हिमोत्कर्ष महिला मंच ने स्तनपान को लेकर आयोजित की जागरूकता कार्यशाला
डॉ. रणधीर जसवाल, ऊना।”माँ का दूध नवजात के लिए केवल भोजन नहीं, बल्कि जीवन की पहली सुरक्षा कवच और पहली प्राकृतिक वैक्सीन है।” यह बात कंवर मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल के प्रबंध निदेशक एवं वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. जगदीश्वर कंवर ने विश्व स्तनपान जागरूकता सप्ताह के उपलक्ष्य में आयोजित जिला स्तरीय जागरूकता कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही।हिमोत्कर्ष महिला मंच एवं संयुक्ता चौधरी हिमोत्कर्ष महिला प्रशिक्षण संस्थान, ऊना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में गर्भवती महिलाओं, नवमाताओं और छात्राओं को स्तनपान के महत्व, वैज्ञानिक तथ्यों तथा इससे जुड़े स्वास्थ्य लाभों की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम में आयुष विभाग की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. जागृति दत्ता मुख्य वक्ता रहीं।डॉ. जगदीश्वर कंवर ने कहा कि शिशु के जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करवाना उसके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण शुरुआत होती है। इससे नवजात मृत्यु दर में कमी आती है और बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से विकसित होती है। उन्होंने कहा कि जन्म के बाद शहद, घुट्टी या अन्य किसी भी पदार्थ की बजाय सबसे पहले माँ का दूध ही दिया जाना चाहिए। जीवन के पहले छह माह तक शिशु को केवल माँ का दूध पिलाना चाहिए, क्योंकि इसमें मौजूद सभी आवश्यक पोषक तत्व, एंटीबॉडी और प्रतिरोधक तत्व बच्चे को अनेक गंभीर संक्रमणों और बीमारियों से सुरक्षित रखते हैं।मुख्य वक्ता डॉ. जागृति दत्ता ने वैज्ञानिक तथ्यों के साथ बताया कि स्तनपान शिशु के संपूर्ण शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास की मजबूत नींव रखता है। उन्होंने कहा कि दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने से बच्चे को उच्च गुणवत्ता वाला पोषण मिलता है, जिससे उसकी प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है और उसका विकास बेहतर होता है।उन्होंने गर्भावस्था के दौरान माँ के शरीर में होने वाले जैविक परिवर्तनों, दूध बनने की प्रक्रिया, स्तनपान की सही तकनीक, बच्चे को गोद में पकड़ने की उचित मुद्रा (पोश्चर) तथा स्तनपान के दौरान बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सही तरीके से कराया गया स्तनपान माँ और शिशु दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी है।डॉ. जागृति दत्ता ने बताया कि स्तनपान कराने वाली माताओं में स्तन एवं गर्भाशय के कैंसर का खतरा कम होता है, प्रसव के बाद रक्तस्राव में कमी आती है, शरीर तेजी से सामान्य स्थिति में लौटता है तथा परिवार नियोजन में भी सहायता मिलती है। उन्होंने कहा कि स्तनपान केवल पोषण का माध्यम नहीं, बल्कि माँ और बच्चे के बीच आजीवन विश्वास, स्नेह और भावनात्मक जुड़ाव का सबसे मजबूत आधार भी है।हिमोत्कर्ष महिला मंच की वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनूपा ठाकुर ने महिलाओं से स्तनपान से जुड़ी भ्रांतियों और अफवाहों से दूर रहने तथा किसी भी प्रकार की शंका होने पर चिकित्सकीय सलाह लेने का आग्रह किया। मंच की सदस्य मंजू मनकोटिया ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया, जबकि रंजना जसवाल ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन रमा कंवर ने किया।कार्यक्रम में डॉ. बीरवल ठाकुर, डॉ. जागृति दत्ता, अनूपा ठाकुर, रंजना जसवाल, मंजू मनकोटिया, रमा कंवर, कविता गोयल, मनीषी ठाकुर, हिमोत्कर्ष प्रशिक्षण संस्थान की उपप्रधानाचार्य रंजू बाला, प्रशिक्षक मीना ठाकुर, निशा सहित 100 से अधिक महिलाएं एवं छात्राएं उपस्थित रहीं। कार्यशाला के अंत में हिमोत्कर्ष महिला मंच की ओर से चिकित्सकों को पौधे भेंट कर पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवन का संदेश भी दिया गया।





























