डीएवी ऊना में विज्ञान प्रतियोगिताओं में दिखी विद्यार्थियों की वैज्ञानिक प्रतिभा
बीएचटी न्यूज, ऊना। डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल, ऊना में कक्षा पांचवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों के लिए अंतर-सदनीय विज्ञान प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता, तार्किक चिंतन और समस्या समाधान की क्षमता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘मॉडल मेकिंग’, ‘माइंड बिहाइंड द मिशन’ तथा ‘साइंस स्ट्रेटजी शोडाउन’ जैसी प्रतियोगिताएं करवाई गईं।कक्षा पांचवीं से सातवीं तक के विद्यार्थियों ने मॉडल मेकिंग प्रतियोगिता में उत्साहपूर्वक भाग लिया और विभिन्न आकर्षक एवं उपयोगी वैज्ञानिक मॉडल प्रस्तुत कर अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। वहीं कक्षा आठवीं से दसवीं के विद्यार्थियों ने ‘द माइंड बिहाइंड द मिशन’ प्रतियोगिता में वैज्ञानिक सोच, अनुसंधान, मिशन की योजना और उसके पीछे की विचार प्रक्रिया को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।कक्षा ग्यारहवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों के लिए आयोजित ‘साइंस स्ट्रेटजी शोडाउन’ में प्रतिभागियों ने अपने वैज्ञानिक ज्ञान, तार्किक चिंतन, रणनीतिक क्षमता और टीम भावना का शानदार प्रदर्शन किया।प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों की प्रतिभा का मूल्यांकन प्राचार्य आर.एल. पाठक, सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रभारी पूनम खन्ना, प्रवीण सहगल, बबीता जोशी, वैशाली, नरेंद्र, रामकुमार धीमान, आरती, सोनिया एवं रमनजीत ने किया।मॉडल मेकिंग प्रतियोगिता में विरजानंद सदन के वानिज और दयानंद सदन के रुद्रांश ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। विजयानंद सदन के उदय तथा विवेकानंद सदन की इनाया ने द्वितीय, जबकि हंसराज सदन के सिमर और रिद्धम ने तृतीय स्थान हासिल किया।‘माइंड बिहाइंड द मिशन’ प्रतियोगिता में हंसराज सदन की शरनया, आरव, दिव्यांशी और सुगंधी की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। दयानंद सदन की टीम द्वितीय तथा विवेकानंद सदन की टीम तृतीय स्थान पर रही।इसी प्रकार ‘साइंस स्ट्रेटजी शोडाउन’ में हंसराज सदन की शिप्रा, आशीष, प्रियंका और निहाल की टीम ने प्रथम स्थान हासिल किया। विवेकानंद सदन की टीम द्वितीय और दयानंद सदन की टीम तृतीय स्थान पर रही। शानदार प्रदर्शन के आधार पर हंसराज सदन को सर्वश्रेष्ठ सदन घोषित किया गया।विद्यालय के प्राचार्य आर.एल. पाठक ने विजेता एवं प्रतिभागी विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में जिज्ञासा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और रचनात्मक सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे विज्ञान को केवल एक विषय तक सीमित न रखें, बल्कि इसे दैनिक जीवन की समस्याओं के समाधान का माध्यम बनाएं।उन्होंने विद्यार्थियों को “सीखो, सोचो, प्रयोग करो और नवाचार करो” का संदेश देते हुए कहा कि वैज्ञानिक सोच ही भविष्य की नई संभावनाओं का आधार है।
































