एस सी बर्ग में किसी जाति को शामिल करने का अधिकार केवल संसद को: पतलयान
करनाल, आशुतोष गौतम। हरियाणा सरकार की और से पाल गडरिया जाति को अनुसूचित जाति वर्ग मे शामिल करने की अधिसूचना के बाद विभिन्न अनुसूचित जाति के संगठनो ने विरोध शुरू कर दिया है। बुधवार को अम्बेडकर समाज कल्याण सभा के करीब एक दर्जन सदस्यों के साथ, सभा के प्रधान अमर सिहं पातलान ने सैक्टर 12 के लघु सचिवालय में आकर मुख्यमंत्री हरियाणा मनोहर लाल के नाम, नगराधीश डा. पुजा भारती को एक ज्ञापन दिया। ज्ञापन में सभा की ओर से कहा गया कि भारतीय संविधान की धारा 341(1) के अनुसार, किसी भी जाति या उप जाति को अनुसूचित जाति में शामिल करने की अधिसूचना जारी करने का अधिकार केवल राष्ट्रपति को है। जबकि धारा 341(2) के अनुसार भारत की संसद द्वारा ही बिल पास कर किसी भी जाति या उपजाति को अनुसूचित जाति में शामिल किया जा सकता है। इस प्रकार बीती 7 जुलाई को हरियाणा सरकार की ओर से जारी की गई सूचना ना तो महामहिम राष्ट्रपति की ओर से जारी की गई और ना ही संसद द्वारा इसका बिल पास किया गया। इस लिए सीधे-सीधे संविधान का उल्लंघन है। ज्ञापन में सभा की ओर से आगे कहा गया कि पाल गडरिया जाति के लोग कभी भी अछूत नहीं रहे है तथा अधिक्तर के पास खेतिहर जमीन भी है। जहां तक गडरिया जाति को सैंसी जाति की उप जाति कहा गया है। उसे लेकर सांसी जाति का गडरिया जाति से दूर-दूर से भी संबंध नहीं है। सैंसी एक अलग जाति है, जो प्रारंभ से ही अनुसूचित जाति में है। भेड़-बकरी का व्यवसाय किसी भी जाति को अनुसूचित जाति बनाने का अधिकार नहीं है। इस प्रकार सरकार की ओर से गडरिया जाति को अनुसूचित जाति बनाना तथा सैंसी (गडरिया) के नाम से अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र बनाने के आदेश देना पूर्णत: असंवैधानिक है। ज्ञापन के अंत में बीती 7 जुलाई को सरकार की ओर से जारी सूचना को रद्द करके गडरिया(पाल) जाति को सैंसी अनुसूचित जाति के नाम से प्रमाण पत्र जारी करने पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।

































