पांच साल की रिकार्ड उपलब्ध्यिों और व्यवहार के साथ आम आदमी के साथ संवाद के कारण प्रदेश में सबसे बड़ी जीत प्राप्त की
करनाल, आशुतोष गौतम (24 अक्तूबर) करनाल जिले के जिस समय भाजपा की नैया भंवर में फंस रही थी। उस समय विपक्ष की सख्त धेराबंदी के बाद भी भाजपा के प्रत्याशी हरविंदर कल्याण ने विरोधियों को पराजित करते हुए जीत हांसिल की। उन्होंने लगभग 17600 से अधिक मतों से कांग्रेस के उम्मीदवार अनिल रांणा को पराजित किया। प्रदेश में मुख्यमंत्री के बाद वह सबसे बड़ी लीड से चुनाव जीते हैं। प्रदेश में जब भाजपा कमजोर पउ़ रही थी। उस समय घरौंडा में कमल खिलाना महत्वपूर्ण रहा। भाजपा नवनिर्वाचित विधायक तथा हैफेड के पूर्व चेयरमैन हरविंदर कल्याण अपने पांच साल तक रिपोर्ट कार्ड लेकर मैदान में उतरे थे। उनके पास उपलब्धियों का भंडार था। जिसके कारण वह जीते। घरौडा में लंबे समय तक विपक्षी विधायक के रहते उपेक्षा का संताप सहा है। इस हलके को पहली बार भाजपा का विजनरी विधायक के रूप में 2014 में हरविंदर कल्याण मिले। जिनके पास पिता देवी सिंह कल्याण की विरासत थी। उन्होंने चुनावी सियासत से पहले अपने हलके में कई बार पदयात्राएं की। लोगों के करीब पहुंचने का काम किया। इंजीनियर से राजनीति में आए हरविंदर कल्याण के पास विकास का एक विजन रहा। उपलव्धियों के क्षेत्र में उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहर लाल के निर्वाचन क्षेत्र को भी पीछे छोड़ दिया। करनाल जिले का इंटरनैश्रल स्तर का पंडित दीन दयाल मैडीकल यूनीवर्सिटी, एनसीसी का प्रशिक्षण केंद्र रक्षा अनुसंधान संसथान का केंद्र घरौंडा को सब डिवीजन बनाने, बेराजगारों के लिए स्किल सेंटर खोलने घरौंडा के लोगों को बाढ़ से मुक्ति दिलवाने, बस स्टैंड बनाने, मल्टी परपज सिविल अस्पताल खुलवाने के साथ साथ करोड़ों रुपए की विकास योजनाओं का धरातल पर लाने के अलावा रेलवे सुविधाएं दिलवाने जैसी उपलब्धिायांं उनके पिटारे में थीं। जिसके बल पर उन्होंने अपने आपको नंबर वन साबित किया। जब कि अन्य विपक्षी दलों के पास खाली हाथ थे। अब सत्ता पक्ष के विधायक को अपने साथ रखना चाहता है। अपने हलके लोगों के सुख दुख में रहने की कला हरविंदर कल्याण में हैं। उनका विकास के प्रति एक विजन हैं। उसी विजन को लेकर उन्होंने अगले पांच साल का भी रोड मेप तैयार कर लिया हैं। घरौंडा के विधायक हरविंदर कल्याण का परिवार भी उनके साथ सेवा में समर्पित हैं। उनकी बेटी भी एक ट्रस्ट बना कर यहां पर सेवा कर रही हैं। जिस दिन पंडित दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय बन कर तैयार हो जाएगा। तो यहां मैडीकल के क्षेत्र में नई खोज होंगी। यहां इंटरनैशनल स्तर की मैडीकल सुविधाएं होंगेी। एम्स से भी बेहतर यह केंद्र बनेगा। यहां पर कालेज महिला कालेज और स्कूलों का अपग्रेडेशन बनाने का काम हैं। वह अपने हलके में आईआईटी और आईटीएम जैसे संसथान खोलने चाहते हैं। करोडा़ें की लागत से करनाल शुगर मिल का नवीनकरण स्वरूप उनके प्रयासों का देन रहा हैं। मुख्यमंत्री के संकट मोचक रहे विधायक हरविं्रदर कल्याण की सादगी और उनका स्वभाव उन्हें आम लेागेांं तक ले जाता है।































