यज्ञ से आधे से कम हुआ वायु प्रदूषण, 370 से 160 पहुंचा एयर क्वालिटी इंडेक्स
Baddi ( kavita Gautam ) पुरातन समय में महर्षि यज्ञ करने के लिए अधिक महत्व देते थे लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया वैसे वैसे लोगों में यज्ञ करने की प्रवृति कम होती गई। यज्ञ करने की महत्ता का पता तब चलता है जब उस पर कोई प्रयोग करने के बाद परिणाम निकलता है। आर्य समाज बददी के अध्यक्ष कुलवीर आर्य ने कहा कि यज्ञ करने से वायु प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह बात उनके द्वारा किए गए प्रयोग में भी सिद्ध हो गई है। उन्होंने बताया कि हरिओम योगा सोसाइटी और आर्य समाज के सदस्यों के घर पर यज्ञ करके किया। दीपावली के मौके पर पटाखे आदि के कारण प्रदूषण का एयर क्वालिटी इंडेक्स सुबह 370 तक पहुंच गया था तथा घर पर यज्ञ के बाद इसकी दोबारा जांच की तो यह घट कर 160 तक पहुंच गया। इससे यह साफ है कि यदि देश के 130 करोड़ लोगो में से पांच प्रतिशत भी महीने में यज्ञ कर ले तो प्रदूषण कि समस्या काफी हद तक ठीक हो सकती है। उन्होंने बताया कि पुराने समय में महर्षि अपने आश्रमों में यज्ञ करते थे तथा लोगों को भी यज्ञ करने के लिए प्रोत्साहित करते थे। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में शुरू से ही यज्ञ करने की संस्कृति रही है। जन्म से लेकर कई अन्य शुभ कार्यों में यज्ञ का आयोजन किया जाता रहा है लेकिन वर्तमान समय में यज्ञ करने का प्रचलन कम हो गया है। ऐसे में यदि इसे दोबारा बढावा दिया जाए तो देश में बढ़ते प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सकता है।






























