एचडीएमए ने की मेहतन रंग लाई-डा. राजेश
स्वास्थ्य विभाग ने जारी की अधिसूचना
बददी ( 4 नवंबर) शाांत गौतम, हिमाचल प्रदेश सरकार ने दवाईयों के निर्माण में कुछ नियमों में फेरबदल किया है। अब हिमाचल प्रदेश के दवा निर्माता उन दवाईयों का निर्माण भी कर सकेंगे जिनके निर्माण पर यहां पर बैन था लेकिन पडोसी राज्यों में उनको बनाने की अनुमति मिली हुई थी। इसके कारण एक देश एक विधान वाली बात लागू नहीं हो रही थी और हिमाचल से ज्यादा हरियाणा व पंजाब को फायदा हो रहा था। हिमाचल प्रदेश सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) ने पत्र जारी कर स्पष्ट किया है कि जिन दवाओं के निर्माण पर भारत सरकार ने प्रतिबंध नहीं लगाया हुआ है और जिनका निर्माण पडोसी राज्यों में हो रहा है उनको हिमाचल में भी निर्मित किया जा सकता है। सूत्रों ने पता चला है कि प्रदेश के ड्रग विभाग के कुछ अधिकारियों ने इन दवाईयों को यह कहकर उद्यमियों को लायसेंस देने से इंकार कर रखा था कि यह प्रतिबंधित है या विवादित है। हिमाचल की कुछ कंपनियां इसको बना रही थी तो जिनके पास पुरानी परमिशन थी और मंशा यही थी उनको लाभ मिलता रहे। इस विसंगति का मुददा हिमाचल ड्रग मैनुफैकचरिंग एसोसिएशन के राज्य प्रधान डा. राजेश गुप्ता व सलाहकार सतीश सिंगला ने सरकार के पास उठाया जिसके बाद सरकार को अपना निर्णय बदलना पडा और पडोसी राज्यों में बन रही दवाईयों को यहां बनाने की ईजाजत देनी पडी। एच.डी.एम.ए के प्रदेशाध्यक्ष डा. राजेश गुप्ता ने नई अधिसूचना के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर व स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार का आभार जताया है और यह निर्णय प्रदेश के हित में है और सबको काम करने का मौका मिलना चाहिए क्योंकि भारत का संविधन इसी बात को परिलक्षित करता है। वहीं दूसरी ओर प्रदेश के दवा उद्यमियों ने यह लडाई लडने के लिए एचडीएमए के पदाधिकारियों की सराहना की है। एचडीएमए ने प्रदेश व बददी के ड्रग अधिकारियों से गुजारिश की है सरकार की इस अधिसूचना को जल्द से जल्द लागू किया जाए ताकि यहां दवाईयों का निर्माण और तेजी से हो सके। इसका इनवेस्टर मीट में भी अच्छा संदेश जाएगा।






























