जयराम सरकार इस मामले में गुजरात सरकार से सीखे कैसे न्या पर्यटन क्षेत्र विकसित होता है
रणधीर जसवाल, धर्मशला ( 6 नवंबर) हिमाचल प्रदेश में होने वाली पहली इन्वेस्टर मीट के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने हिमाचल सरकार को 11 करोड़ रूपए आर्थिक सहायता के रूप में दिए हैं जिनमें 10 करोड उद्योग मंत्रालय और एक करोड़ रुपए पर्यटन मंत्रालय की ओर से जारी किए गए हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा यह दावा करना कि इससे प्रदेश में पौने दो लाख के करीब रोजगार सृजन होगा इस पर भी आम जनता में शंसय बना हुआ है। इन सब तामझाम के बीच हिमाचल प्रदेश में पहले से ही स्थापित उद्योग मूलभूत सुबिधाओं के लिए आंसू बहा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा जिस प्रकार से धर्मशाला की इन्वेस्टर मीट को लेकर बड़ी – बड़ी ढींगे हांकी जा रही है वह कहीं कागजों तक ही सिमटी न रहेंं। जानकारों का कहना है कि प्रदेश की जयराम सरकार को गुजरात की सरकार से सीखना चाहिए। गुजरात राज्य के एक छोटे से स्थान केबड़िया को पर्यटन के क्षेत्र में विकसित करके विश्वपटल पर ला दिया है जबकि यहां पहले जंगल और झाड़ियों का ही राज था। चंद वर्ष में ही यह कारनामा गुजरात सरकार ने कर दिखाया है।
इन्वेस्टर मीट को कैसे जमीनी स्तर पर उतारा जाएगा रोडमैप सरकार जारी नही कर पाई
इन्वेस्टर मीट को कैसे जमीनी स्तर पर उतारा जाएगा इसको लेकर अभी तक कोई रोडमैप जयराम सरकार का सामने नही आ पाया है। प्रदेश में पर्यटन के क्षेत्र की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन पर्यटन निगम के फिसड्डीपन से यह क्षेत्र भी काफी पिछड़ा हुआ है।
जानकारों की माने तो हिमाचल में औद्योगिकीकरण इस लिए पिछड़ा हुआ है क्योंकि इन क्षेत्रों में मूलभूत सुबिधाओं को जमीनी स्तर पर उतारने में सरकरें नाकाम रही हैं। हिमाचल से भारी तदाद में उद्योगों का पलायन हुआ है जिसको रोक पाने में सरकारी नीति फैल साबित हुई है। प्रदेश में पहले से ही जो औद्योगिक क्षेत्र बनाए गए हैं वह इतने वर्षों के बाद भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। इसके चलते उद्योगों के पलायन करने से रोजगार के अवसर भी हिमाचलियों से छिने हैं।उल्लेखनीय है कि प्रदेश के उद्यमियों ने इस बात पर सवाल उठाए थे कि पूंजी निवेश के लिए बड़े-बड़े घरानों को मोहित करने के लिए रैड कारपेट बिछाया जा रहा है। जबकि वो पहले से ही प्रदेश की आर्थिकी में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी अनदेखी कर रही है। इससे अंदाजा लगता है कि प्रदेश की स्थिति इस मामले में क्या है।






























