प्रदूषित पर्यावरण से निपटने के लिए अब तक लगा चुकी है 340 त्रिवेणियां
करनाल, आशुतोष गौतम (7 नवंबर) मरकर भी याद आएंगे, किसी की सांसों में हम मुस्कराएंगे। उपरोक्त कथन को सफल बनाने के लिए समाधानांचल की राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट संतोष यादव जी-जान से जुटी हैं। वह हरियाणा की पहली ऐसी महिला है जिन्होंने पर्यावरण के महत्व को समझा और दिन-प्रतिदिन प्रदूषित हो रहे पर्यावरण को खत्म करने का बीड़ा उठाया। अपने इस मकसद के तहत उन्होंने देश के कई राज्यों में त्रिवेणी (बड़, नीम और बरगद) लगाने के अभियान की शुरुआत की, जिसके फलस्वरुप आज उनके द्वारा हरियाणा, पंजाब और राजस्थान सहित कई अन्य राज्यों में 340 त्रिवेणियां लगाई और उनका बाखूबी पालन-पोषण कर बड़ा करने में कामयाब हुई हैं। उनका मकसद सिर्फ इतना है कि मानवता को शुद्ध प्राण वायु मिल सके। धरती, वायु व जल जोकि आज बहुत ज्यादा प्रदूषित हो चुका है, उससे पूर्ण रुप से निजात मिल सके। वह निरन्तर जहरीले रासयनिक तत्वों के प्रभाव से मुक्ति पाने के उपायों पर काम में तत्लीन है। उनका कहना है कि जो समस्या आज उत्पन्न हुई है वह एक दिन की कोताही नहीं है। ये बरसों जो आपने प्रकृति के साथ छेड़छाड़ की है उसका परिणाम है। उनका मानना है कि इस भयावह स्थिति से यदि निपटना है तो इसकी तह तक जाना होगा लेकिन यहां असल समस्या जड़ से खत्म करने के राजनीतिक खतरे हैं। समस्या बनी रहनी चाहिए तभी तो सत्ता पक्ष एवं विपक्ष को फायदा पहुंचेंगा। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए अलोकप्रिय दूरगामी प्रयास करने होंगे। इसकी कीमत को समझना होगा। दूरदृष्टि वाली नीतियां अपनानी पड़ेंगी। 1952 में लंदन में ‘ग्रेट स्माग ऑफ लंदनÓ में चार से पांच हजार मौतें हुई तब से वहां कोयले जनित आग के हर तरीके पर रोक लगा दी गई। कारखाने व रेल के इंजन तक बंद करवा दिये गए। अगर दूरगामी परिणाम सरकार और जनता करेगी तब ही इस समस्या से निजात पाया जाएगा।































