सेहत से खिलवाड़ करने वालों पर फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड ऑथोरिटी ऑफ इंडिया सख्त, विभाग ने चेताया, होगी सख्त कार्रवाई, जल्द कराएं रजिस्ट्रेशन, खाद्य पदार्थों से जुड़े कारोबारी को इस योजना के तहत ट्रेंड और सर्टिफाइड होना अनिवार्य
करनाल, आशुतोष गौतम (12 नवंबर) फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने खाद्य सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए खाद्य पदार्थों से जुड़े कारोबारियों के लिए नियमों पर सख्ती करते हुए फूड सेफ्टी ट्रेनिंग एंड सर्टिफिकेशन यानी एफओएसटीएसी (फॉस्टैक) को लागू करने का ऐलान कर दिया है। अब प्रदेश के हर फूड बिजनेस ऑपरेटर (एफबीओ) अर्थात खाद्य पदार्थों से जुड़े कारोबारी को इस योजना के तहत ट्रेंड और सर्टिफाइड होना अनिवार्य होगा। कारोबारियों को इस योजना के तहत 4 घंटे की ट्रेनिंग प्रदान कर सर्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा। यह सर्टिफिकेट दो साल तक मान्य रहेगा। ऐसा न करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। खाद्य पदार्थ के कारोबार से जुड़े हर छोटे-बड़े कारोबारी के लिए ट्रेनिंग लेकर सर्टिफिकेट प्राप्त करना अनिवार्य है।
708 रुपए होगी ट्रेनिंग फीस:
प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए हर एफबीओ यानी खाद्य कारोबारी को 708 रुपए फीस जमा करवानी होगी। प्रशिक्षक हर जिला में खुद खाद्य कारोबारियों और कर्मचारियों से संपर्क कर उन्हें प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। वहीं कारोबारियों को प्रशिक्षण प्रदान करने वाली एजेंसी एक्यूएमसीएस सभी व्यवस्था करेगी। इसके अलावा हर प्रशिक्षु कारोबारी को गोल्डन रूल्स ऑफ एफएसएसएआई, हेड मास्क, एप्रेन और माऊथ मास्क भी प्रशिक्षण के दौरान प्रदान किया जाएगा, जबकि प्रशिक्षण के दौरान ही कारोबारियों का पंजीकरण कर समापन पर उन्हें प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे।
सैक्टर-16 गवर्नमेंट पॉलीक्लीनिक में कराएं रजिस्ट्रेशन:
ट्रेनिंग और सर्टिफिकेट के लिए सैक्टर 16 स्थित गवर्नमेंट पॉलीक्लीनिक के ग्राउंड फ्लोर पर यह व्यवस्था की गई है। कारोबारी यहां रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। तीन माह के अंदर हर कारोबारी को ट्रेनिंग लेनी होगी, जिसके पास यह सर्टिफिकेट नहीं होगा वह कारोबार नहीं कर सकेगा और सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।
धार्मिक व शिक्षण संस्थानों की रसोई में भी पहुंचेगा फॉस्टैक:
खाद्य पदार्थों से जुड़े उद्योगों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों और प्रबंधकों को प्रशिक्षित करने के बाद जल्द ही फॉस्टेक प्रदेश भर के उन तमाम धार्मिक स्थलों पर भी दस्तक देगा, जहां रोजाना भोग तैयार करने से लेकर लंगरों तक की व्यवस्था रहती है। वहीं इसके साथ ही मिड डे मील तैयार करने वाले स्कूलों की रसोई तक भी फॉस्टैक का असर दिखेगा। एफएसएसएआई द्वारा खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को मजबूत करने और खाद्य सुरक्षा को पुख्ता बनाने के लिए फॉस्टैक को लागू कर दिया है। जिसके तहत प्रशिक्षण की प्रक्रिया को शुरू कर दी है।
खाने-पीने का सामान बनाओ-बेचो, ट्रेनिंग जरूरी, नहीं तो लाइसेंस होगा रद्द:
डजिग्नेटिड ऑफिसर कम लाइसेंसिंग ऑथोरिटी, करनाल ओम कुमार सिवाच ने बताया कि शासन ने खाद्य एवं पेय पदार्थ निर्माता और विक्रय करने वालों के लिए अब खाद्य सुरक्षा का प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया है। प्रत्येक खाद्य पदार्थ निर्माता व विक्रेताओं द्वारा यदि प्रशिक्षण नहीं लिया गया है तो आने वाले दिनों में संबंधित के खिलाफ अग्रिम कार्रवाई के साथ-साथ लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। एफएसएसएआई (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के निर्देश पर खाद्य एवं पेय पदार्थ निर्माताओं और विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा का प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया है। एफएसएसएआई की फॉस्टिक योजना के तहत सभी लाइसेंसधारी खाद्य निर्माताओं/विक्रेताओं या बिना लाइसेंसधारी खाद्य निर्माताओं/विक्रताओं के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम के तहत साफ सफाई, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, पोषक तत्व, रख-रखाव, हैंडलिंग, निर्माण के दौरान सुरक्षा के तरीके आदि पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिससे गुणवत्तायुक्त और मानक स्तर के खाद्य पदार्थ तैयार हो सकें।
विशेषज्ञ देंगे प्रशिक्षण:
प्रशिक्षण में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के अनुसार खाद्य एवं पेय पदार्थों बनाने की प्रक्रिया/विक्रय और उसकी बेहतर गुणवत्ता एवं आधुनिक तकनीक का प्रयोग करते हुए मानक स्तर के खाद्य एवं पेय पदार्थ का उत्पादन किया जा सके, विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस दौरान लोगों से सुझाव, शिकायत लेकर जिज्ञासा का भी समाधान किया जाएगा।
प्रशिक्षण के बाद प्रमाण पत्र दिया जाएगा:
एफएसएसएआई के निर्देश पर हर लाइसेंसधारी खाद्य एवं पेय पदार्थ निर्माता और बिना लाइसेंसधारी खाद्य निर्माताओं/विक्रेताओं एवं सभी खाद्य पदार्थ विक्रेताओं को यह प्रशिक्षण लेना जरूरी होगा। लाइसेंसधारी होटल, रेस्टोरेंट एवं बार संचालक भी प्रशिक्षण में शामिल होंगे। प्रशिक्षण के बाद प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा। ऐसा नहीं करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वर्ष 2011 से लागू इस नियम पर सख्ती से अमल करने के आदेश एफएसएसएआई ने दिए हैं। ऐसे में आनेवाले दिनों में खाद्य पदार्थ विक्रेताओं ने प्रशिक्षण प्रमाणपत्र नहीं दिखाया तो अन्न व औषधि विभाग की ओर से इन पर कार्रवाई होगी। इससे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के साथ सुरक्षिता भी रहेगी।
अब नहीं होगा सेहत से खिलवाड़:
उल्लेखनीय है कि रोजगार की कमी कहें या ज्यादा मुनाफा कई लोग विभिन्न तरीके से खाद्य पदार्थ बेचते हैं और लोगों की सेहत से खिलवाड़ करते हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। कोई हाथ ठेले के सहारे बेचता है, तो कोई बड़े हॉटेल्स के माध्यम कई तरह के खाद्य पदार्थ बेचता है। किसी तरह कोई नियम लागू नहीं लागू करने से कोई भी कहीं भी खाद्य पदार्थ बनाकर बेचता है। जिससे खाद्य पदार्थ विक्रेताओं की संख्या लगातार बढऩे में खान-पान में असुरक्षिता भी बन रही है, जिसमें किराना व्यवसायी से लेकर पकोड़े बेचनेवाले, फ्रूट्स बेचने वाले, बड़े हॉटेल्स भी शामिल हैं, लेकिन अब यह मनमाने ढंग से खाद्य पदार्थ नहीं बेच सकेंगे बल्कि इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण लेना पड़ेगा। यह प्रशिक्षण खुद या मालिक या अपने कर्मचारियों में किसी को भी करा सकते हैंं। प्रशिक्षण के बाद एक प्रमाण पत्र और किट मिलेगी। किट में टोपी और मास्क दिए जाएंगे। साथ ही साफ-सफाई रखने और गुुणवत्ता पूर्वक खाद्य वस्तुएं लोगों को उपलब्ध करवाने के बारे में जागरूक किया जाएगा। इस सर्टिफिकेट से प्रमाणित होगा कि वहां काम करने वाला स्टाफ हाईजीन और फूड सेफ्टी के लिए ट्रेंड है या नहीं।


































