राष्ट्रीय ध्वज का करें सम्मान, नियमों का करें पालन, अवमानना पर हो सकती है कानुनी कार्यवाही
करनाल, आशुतोष गौतम ( 4 मार्च ) एसपी सुरेन्द्र सिंह भौरिया ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिये एडवाईजरी जारी करते हुये कहा कि राष्ट्रीय ध्वज हमारे देश के लोगो की आशाओं एंव आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है ओैर इसलिये इसे सम्मान की स्थिति मिलनी चाहिये। राष्ट्रीय ध्वज के लिये एक सार्वभौमिक लगाव और आदर तथा वफादारी होती है। तथापि राष्ट्रीय झण्डे के संप्रदर्शन पर लागू होने वाले कानूनों, अभ्यास तथा परंपराओं के संबंध में जनता के साथ-2 सरकारी संगठनों/ एजेंसियों में भी जागरूकता का अभाव देखा गया है। अक्सर यह देखा गया है कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और खेलकूद के अवसरों पर कागज के झण्डों के स्थान पर प्लास्टिक के झण्डो का प्रयोग भी किया जा रहा है। चूंकि, प्लास्टिक के झण्डें कागज के समान जैविक रूप से अपघटय नही होते हैं। ये लम्बे समय तक नष्ट नही होते हैं। और प्लास्टिक से बने झण्डो का सम्मानपूर्वक उचित निपटान सुनिश्चित किया जाना चाहिये। अत सभी से यह अनुरोध है कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और खेलकूद के अवसरों पर भारतीय झण्डा सहिंता 2002 के प्रावधान के अनुरूप जनता द्वारा केवल कागज से ही बने झण्डों का प्रयोग किया जाना चाहिये। समारोह उपरांत ऐसे कागज के झण्डों को न तो विकृत किया जाए और न ही जमीन पर फेंका जाये। ऐसे झण्डों का निपटान उनकी मर्यादा अनुरूप किया जाए।
राष्ट्रीय ध्वज के साथ क्या-2 ना करें:- राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम 1971 की धारा 2 के तहत यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर या अन्य स्थान पर भारतीय ध्वज के किसी भाग को जलाता, काटता, तोडता-मरोडता, खण्डित करता, रौंदता या किसी अन्य प्रकार से लिखित या मौखिक रूप में या अन्य क्रियाकलापों द्वारा अपमान करता है या अवमानना करता है। तो उसे 3 साल तक की सजा या जुर्माना या दोंनो से दण्डित किया जा सकता है। राष्ट्रीय ध्वज को किसी भी प्रकार पोशाक या वर्दी के भाग के रूप में इस्तेमाल नही किया जा सकता है। झण्डे को तकिये, रूमालों, नैपकिनों व ड्रेस सामग्री पर छापा नही जा सकता। कटे-फटे, मैले-कुचेला झण्डा फहराया नही जा सकता।
































