श्री घण्टाकर्ण मन्दिर में भक्तिमय आयोजन

करनाल, आशुतोष गौतम ( 26 oct) महाप्रभावी श्री घण्टाकर्ण महावीर देव तीर्थस्थान पर विशेष कृपा दिवस दीपावली से पहले वर्ष की सबसे अधिक महत्वपूर्ण कृष्ण चौदस के उपलक्ष्य में मासिक श्रद्धालु संगम का विशेष भक्तिमय आयोजन इन्द्री रोड स्थित श्री आत्म मनोहर जैन आराधना मन्दिर में सैंकड़ों भक्तजनों की भक्तिमयी उपस्थिति में भावपूर्ण वातावरण में हुआ। श्री घण्टाकर्ण बीजमन्त्र के सामूहिक जाप से देवता का आह्वान करते हुए लोकमंगल तथा जन-कल्याण के लिए दैवी कृपा एवं आशीर्वाद की याचना की गई। साध्वी जागृति, अजय जैन, नयन जैन, रीटा जैन, अनिता जैन, विरेंद्र जैन, अलका जैन ने अपने भक्ति-गीतों से सबको भाव-विभोर कर दिया। मेरे घर के आगे दादा तेरा मन्दिर बन जाए, है यह पावन भूमि यहां बार-बार आना, मेहरां वालिया दादा रखीं चरणां दे को, दादा जी तुसीं मिलया करो कोई गल्ल सुनानी हुंदी है, मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है, घण्टाकर्ण दादा ने जबसे पकड़ा है मेरा हाथ बदली है तकदीर और बदले हालात आदि भजनों ने सभी को भक्तिरस में झूमने के लिए मजबूर कर दिया। जैन महिला मण्डल, उत्तम नगर दिल्ली ने खूब रौनक लगाई। महासाध्वी श्री प्रमिला जी ने कहा कि श्री घण्टाकर्ण अतिशय प्रभावी, शक्तिसम्पन्न, दिव्य चमत्कारी, सम्यग्दृष्टि तथा भक्तों पर रहमत बरसाने वाले भक्तवतसल देव हैं जो राजभय, चोरभय, अग्रिभय, सर्पभय से छुटकारा दिलाते हैं और भूत-पे्रत की बाधा का निवारण करते हैं। इनके प्रताप से अड़चने दूर होती हैं, कार्य सफलता मिलती है ।

श्री घण्टाकर्ण प्रसन्न होकर नौ निधियों, बारह सिद्धियों से परिपूर्ण करते हैं। इनका आशीर्वाद विघ्न-बाधाओं के कांटों को चुनकर जीवन के मार्ग को आसानी से चलने योग्य बनाता है। श्री घण्टाकर्ण जीवन की दिशा और दशा दोनों को बदलते हैं। जैन परम्परा के अनुसार घण्टाकर्ण जी बावन वीरों में तीसवें वीर-शिरोमणि और वीरों की परिषद में सेनापति का स्थान प्राप्त प्रभावशाली देव हैं। इन्हें चौबीसवें तीर्थकर भगवान महावीर का शासन-रक्षक, धर्मनिष्ठ व्यक्ति के जीवन में उसके लिए अनुकूलता का सृजन करने वाला, शान्ति-तुष्टि तथा पुष्टि का विस्तारक और भक्तों पर निहाल होकर उन्हें मालामाल करने वाला अतिशय शक्तिसम्पन्न देव माना जाता है। हिन्दू परम्परा में इन्हें बद्रीनाथ तीर्थ का क्षेत्रपाल देवता, शिवजी का गण तथा उनके पुत्र कार्तिकेय का अभिन्न सहयोगी माना जाता है। बौद्ध दर्शन ऐसा मानता है कि श्री घण्टाकर्ण जी को अनुकूल तथा प्रसन्न किए बिना मन्त्र-यन्त्र की कोई साधना सफल नहीं होती। श्री घण्टाकर्ण जी ऐसे देवता है जिनकी अनुकम्पा प्राप्त हो जाने पर ब्रह्माण्ड की कोई भी शक्ति कुछ बिगाड़ नहीं सकती तथा उनका वरदहस्त न रहने पर ब्रह्मा भी मददगार नहीं हो सकते। अन्त में बृहत्घण्टाकर्ण स्तोत्र सुनाया गया। इस अवसर पर महासाध्वी श्री प्रमिला जी महाराज ने विशेष रूप से बताया कि मानव जीवन दुर्लभ है। उसका अन्तिम साध्य जन्म-मरण से मुक्त होना है जिसका साधन धर्म की आराधना है। धर्म का आधार मानस की पवित्रता, भावनाओं की उज्जवलता, तपमूलक आचार का अनुसरण है पर यह तब सध सकता है जब मनुष्य के घर-कारोबार की स्थिति सन्तोषजनक हो, दैनन्दिन जीवन निर्वाह की समीचीन व्यवस्था हो, उसका सांसारिक जीवन सुखमय हो। सोचने की बात है कि जिसके पास दो वक्त खाने की व्यवस्था नहीं है, रहने को अनुकूल इलाज कराने की व्यवस्था नहीं है वह धर्मसाधना कैसे कर पाएगा। जीवन की इन मौलिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए देवी-देवताओं की उपासना का विधान बनाया गया है ताकि साधक पीड़ा, रोग, शोक, कष्ट आदि से छुटकारा पा सके। श्री घण्टाकर्ण जी अपनी अप्रतिम क्षमता से सब कुछ अनुकूल करने में समर्थ हैं। प्रात: कालीन वीरेन्द्र जैन ने की। दोपहर की मुख्य आरती और प्रीतिभोज का लाभ वीरेन्द्र जैन ने अपने पौत्र के जन्म के उपलक्ष्य में लिया। सायंकालीन आरती का लाभ विजय जैन पार्षद ने लिया। इस मौके पर हजारों श्रद्धालुगण उपस्थित हुए। लुधियाना, अम्बाला शहर से दो-दो बसें तथा दिल्ली से एक बस के अलावा सैंकड़ों कारों से घण्टाकर्ण दादा के भक्तजन हाजिरी लगाने आए। विभिन्न स्थानों से सामान्य भक्तों के अलावा अनेक दलों से सम्बन्धित राजनीतिक, न्यायिक, प्रशासनिक एवं पुलिस विभाग के अधिकारी दैवी कृपा पाने के लिए कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर सभी मंदिरों तथा परिसर को खूबसूरत ढंग से सजाया गया तथा कृत्रिम रोशनी में सुन्दरता देखते ही बनती थी। सभी भक्तों ने दीप-अर्पण कर अपनी भावना प्रकट की।































