जब किसी गरीब का आशियाना गिरने से बचाया जा सकता है तब सरकार उसकी मदद को आगे नही आती है और जब किसी का घर गिर जाता है तब सरकार आंशिक तौर पर मदद देकर अपनी जिम्मेदारी निभाने का दम भरती हुई दिखाई देती है। जबकि पीड़ित व्यक्ति अपने जीवन भर की जमा पूंजी से बनाए गए अपने घर से हाथ धो बेठता है। जिला ऊना के मलाहत गांव में ऐसा ही एक परिवार डर – डर कर रह रहा है जो सरकार से मदद की आस लगाए हुए है , लेकिन सरकार उसकी मदद को आगे नही आ रही है। सरकार इस इंतजार में बेठी हुई है कि किसी बारिश में उक्त व्यक्ति का घर ढेह जाए और फिर वह पीड़ित की मदद करने आगे आए। जबकि पीड़ित की दुनिया लुट जाने के बाद यह मदद पीड़ित परिवार के लिए ऊंट के मूंह में जीरा के समान होती है। मलाहत निवासी रामनाथ धीमान का कहना है कि उसने बड़ी मुश्किल से अपने जीवन भर की जमा पूंजी से परिवार के लिए घर बनाया है जिस पर अब गिरने का खतरा मंडरा रहा है। उसने बताया कि बारिश के कारण पहाड़ी में भूस्खलन होने के बाद उसका घर भी खतरे में आ गया है। उसके पास इतना पैसा नही है कि वह अपने मकान को बचाने के लिए इसके साथ डंगा लगा सके। लोगों का कहना है कि अगर भविष्य में यह मकान गिरता है तो यहां पर स्थित अन्य लगभग 25 घरों को भी खतरा पैदा हो सकता है। वही लोगों का कहना है कि इस मामले से स्थानीय पंचायत को भी अवगत करवाया गया है लेकिन कोई मदद पीड़ित परिवार को नही मिल सकी है। जानकारों का कहना है कि प्रदेश सरकार आजकल उन घरों की तलाश कर रही है जो बारिश में यां भूस्खलन में ढेह चुके हैं । ऐसे पीड़ित परिवारों को एक – डेढ लाख रूपए दिए जाने हैं जबकि उनका नुकसान करीब आठ – दस लाख रूपओं का होता है। ऐसे सिस्टम पर सवाल खड़े करते हुए कहा जा रहा है कि इस मामले में अगर समय रहते सरकार मदद कर दे तो कइयों के कीमती आशियाने गिरने से बच सकते हैं।
मलाहत में गरीब का मकान गिरने को सरकार कर रही इंतजार, नही मिली कोई मदद
जसवाल , ऊना (20 सितंबर)































