इंसाफ के लिए अफसरों के चक्कर लगा रहे सब इंस्पेक्टर ध्रुव कुमार ने आत्महत्या की बात की तो मुख्यालय ने सुनी बात
जसवाल (ऊना) हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग लगभग 22 वर्षों से अपने ही कर्मचारी को न्याय नहीं दिला सका है। जिसका कसूर बस इतना था कि उसने अपनी डियूटी पूरी ईमानदारी से निभाई और उसको इसके लिए अपने ही पुलिस अधिकारी की साजिश का शिकार होना पड़ा है। पुलिस विभाग में सव इंस्पेक्टर ध्रुव कुमार पिछले 22 सालों से इंंसाफ के लिए अपने अफसरों के आगे चक्कर लगा रहा है लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। 22 सालोंं से जांच के नाम पर सब इंस्पेक्टर को एक भी प्रमोशन नहीं दिया गया है। बताया जा रहा है। इस दौरान इनके लगभग 50 जूनियर जिनमे 25 इंस्पेक्टर और 5 डीएसपी रैंक तक प्रमोशन पा चुके हैं जबकि इनकेेे कई साथी एएसपी रैंक तक भी पहुंचेे हैं, लेकिन ध्रुव आज तक भी सब इंस्पेक्टर है जबकि जून माह में वह रिटायर हो रहेे हैं। सब इंस्पेक्टर ने डीजीपी को पत्र लिखकर सुनवाई कर फैसला लेने या आत्महत्या करने का पत्र लिखा तो मामले की सुनवाई शुरू की गई खास बात यह है कि अभी भी उसे इंसाफ का इंतजार है । ध्रुव कुमार के खिलाफ तत्कालीन एडिशनल एसपी ऊना के निर्देश पर एक मामले में विभागीय जांच शुरू हुई जांच चलती रही और उसके नाम पर कुमार को प्रमोशन नहीं मिला, सूत्रों के अनुसार लंबी जद्दोजहद के बाद ध्रुव कुमार की जांच पूरी हुई लेकिन आरोप सही नहीं पाए गए। आरोप यह था कि 1999 में ध्रुव कुमार मैहतपुर बैरियर पर जांच करने बस की अगली खिड़की से चढ़े और पिछली खिड़की से उतर गए और जो बस नंबर लिखा गया वह किसी स्कूटर का नंबर निकला जिससे यह आरोप धरे के धरे रह गए।
बताते है कि तत्कालीन कमिशनर कम होम सेक्रेटरी द्वारा ओडर जारी किए गए थे कि प्रदेश के बैरियर पर बाहर से आने वाले वाहनो की चैकिंग होगी, लेकिन ऊना की तत्कालीन एडिशनल एसपी ने इन ओडर को निरस्त कर दिया जबकि उसके पास तत्कालीन कमिशनर कम होम सेक्रेटरी के उक्त ओडर को निरस्त करने की कोई पावर नही थी। यही नहीं जब कुमार के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई तो इसकी अनुमति जिला मैजिस्ट्रेट से नहीं ली गई जबकी नियम यह है कि जांच की अनुमति जिला मैजिस्ट्रेट से लेनी अनिवार्य है।
1999 में स्कूटर सीज करने पर मिली सजा- वर्ष 1999 में स्कूटर के दस्तावेज नही होने के चलते कुमार द्वारा उसको सीज कर लिया गया और इस प्रकार इमानदारी से डियूटी करने पर उनके यह सजा मिली है और वह अपने ही विभाग से पढ़तारित होते रहे। ध्रुव कुमार की वृद्ध माता लज्जा देवी ने डीजीपी से लेकर मुख्यमंत्री, राज्यपाल, प्रधानमंत्री तक को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई कि जांच में बेटे के खिलाफ दोष साबित ना होने के बावजूद उसे प्रमोशन ना मिलना अन्याय है वहीं कहीं भी सुनवाई ना होने पर खुद एसआई ध्रुव कुमार ने डीजीपी को पत्र लिखकर सुनवाई करने या आत्महत्या की बात कह दी। पुलिस मुख्यालय ने ध्रुव की वीडियो कॉन्फ्रेंस से बात करा दी अभी तक मामले में कोई फैसला नहीं हो सका है। वर्ष 1992 में बेहतर कार्य करने के लिए प्रधानमन्त्री जीवन रक्षा पदक से भी ध्रुव कुमार को सम्मानित किया गया है। देखना यह है कि ध्रुव कुमार को रिटायरमेंट से पहले अपने अन्य साथियों की तरह डीएसपी व एडिशनल एसपी तक का प्रमोशन मिलता है जा वह सब इंस्पेक्टर रहते हुए रिटायर हो जाएंगे।

































