कुछ अधिकारियों के ऐसे रवैये से पूरा महकमा बदनाम हो रहा है, सरकार की भी जमकर हो रही किरकिरी
करनाल, आशुतोष गौतम (8 नवंबर) प्लॉट धारकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध न कराने पर उपभोक्ता अदालत ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के एस्टेट ऑफिसर को जमकर फटकार लगाई है। एस्टेट ऑफिसर के जमानती वारंट जारी किए गए हैं। उन्हें 13 नवंबर को अदालत के सम्मुख पेश होने को कहा गया है। सुनवाई के दौरान उपभोक्ता अदालत ने एचएसवीपी को जमकर फटकार लगाई। गौरतलब है कि प्लॉटधारकों को मूलभूत सुविधाएं न देने पर यह सुनवाई हुई है। वहीं आदेश में ये भी कहा गया है कि एस्टेट ऑफिसर अदालत के आदेश को लेकर भी गंभीर नहीं हैं। अगली सुनवाई पर अदालत सख्त रुख अख्तियार कर सकती है। वहीं उपभोक्ताओं का कहना है कि लाखों की इन्वेस्टमेंट के बाद भी उन्हें हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने छह साल बाद भी मूलभूत सुविधाएं तक मुहैया नहीं कराई और वे
धक्के खाते फिर रहे हैं। कुछ अधिकारियों के ऐसे रवैये से पूरा महकमा बदनाम हो रहा है और सरकार की भी जमकर किरकिरी हो रही है। चमन गार्डन निवासी अंजू गुप्ता ने उपभोक्ता अदालत के आदेश दिखाते हुए बताया कि उन्होंने करीब 6 साल पहले सेक्टर-12 स्थित हर्षा केथ्रीसी मॉल के पास प्लॉट खरीदे थे। पूरी रकम एचएसवीपी के खाते में जमा करा दी गई और उन्हें प्लॉट पर कब्जा दे दिया गया। कब्जे के बाद उन्होंने विभाग से मूलभूत सुविधाएं (बिजली, पानी, सीवरेज, सडक़े) मांगी तो कोई सुनवाई नहीं हुर्ई। वे जिला उपभोक्ता अदालत गए तो अदालत ने सुविधाएं मुहैया कराने के आदेश दिए। इसके बाद स्टेट उपभोक्ता अदालत में अपील की तो वहां से भी अधिकारियों को सुविधाएं उप्लब्ध कराने के आदेश हुई, लेकिन अधिकारियों के कानो पर जूं तक नहीं रेंगी। परेशान होकर वे आदेश लागू कराने के लिए जिला
उपभोक्ता अदालत पहुंचे तो अधिकारियों को बुलाया गया, लेकिन वे पेश नहीं हुए। अब अदालत ने एस्टेट ऑफिसर के जमानती वारंट जारी कर हाजिर होने के आदेश दिए हैं। इतना ही नहीं ट्रेजरी ऑफिस को एस्टेट ऑफिसर की सैलरी अटैच करने के आदेश दिए गए हैं। पीडित का कहना है कि उन्होंने यहां इसलिए प्रॉपर्टी खरीदी थी ताकि कोई व्यापार कर सकें। विभाग की अनदेखी के कारण सालों बाद भी वे अपना रोजगार शुरू नहीं कर सके और उनके लाखों रुपए मिट्टी हो गए। अब उपभोक्ता अदालत की सख्ती के बाद उन्हें न्याय की उम्मीद जगी है।
































