लाखों की राशि फंसी हुई है दवा निर्माता कंपनियों के पास जीएसटी से संबंधित परेशानियों पर भी थोक दवा विक्रेताओं ने किया मंथन
बीचटी न्यूज, मंंडी ( 17 नवंबर) हिमाचल प्रदेश के थोक दवा विक्रेताओं ने दवा निर्माता कंपनियों से जीएसटी लागू होने से पहले के स्टाॅक पर लगे जीएसटी का भुगतान जल्द करने की मांग उठाई है। मंडी में संपन्न हुई हिमाचल प्रदेश थोक दवा विक्रेता संघ की बैठक में इस विषय पर गहनता से चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता संघ के प्रदेशाध्यक्ष प्रमोद कौशल ने की। बैठक में शिमला, मंडी, कुल्लू और बिलासपुर जिलों से आए करीब 30 थोक दवा विक्रेताओं ने भाग लिया। बैठक के बारे में जानकारी देते हुए संघ के प्रदेशाध्यक्ष प्रमोद कौशल ने बताया कि जब देश भर में जीएसटी लागू हुआ तो उस वक्त थोक दवा विक्रेताओं के पास पुराना स्टाॅक भी पड़ा था। दवा निर्माता कंपनियों ने आश्वस्त किया था कि इस स्टाॅक पर जो भी जीएसटी लगेगा उसका कंपनी की तरफ से भुगतान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बहुत सी कंपनियों ने तो पुराने स्टाॅक पर जीएसटी का भुगतान कर दिया है लेकिन कुछ कंपनियां ऐसी हैं जो अभी तक इस भुगतान को नहीं कर पाई हैं। इन कंपनियों के पास दवा विक्रेताओं का लाखों रूपया फंसा हुआ है। प्रमोद कौशल ने बताया कि कंपनियों के साथ इस संदर्भ में वार्ता चल रही है लेकिन जल्द निर्णय न होने की स्थिति में संघ कंपनियों के प्रति कड़ा रूख अपना सकता है।
प्रदेश के संगठन सचिव नवनीत तरेजा ने बताया कि मंडी में आयोजित बैठक में थोक दवा विक्रेताओं को जीएसटी से संबंधित पेश आ रही समस्याओं पर भी चर्चा की गई। विक्रेताओं को जीएसटी की बारीकियों के बारे में बताया गया और उनकी छोटी छोटी परेशानियों का मौके पर ही समाधान भी किया गया। उन्होंने बताया कि जल्द ही संघ की अगली बैठक आयोजित करके आगामी रूपरेखा तैयार की जाएगी।
बैठक में प्रदेश सचिव सुभाष ऐरी, मंडी जिला के अध्यक्ष अवनिंदर ठुकराल, महासचिव अश्वनी ठाकुर, कोषाध्यक्ष संजीव कपूर और संगठन सचिव दीपक कपूर सहित अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे।

































