तेज बुखार, खांसी, बदन दर्द या सांस लेने में दिक्कत को ‘सामान्य वायरल’ समझना पड़ सकता है भारी, समय पर डॉक्टर की सलाह जरूरी. डॉ रणधीर जसवाल, ऊना । मौसम में बदलाव के बीच स्वाइन फ्लू और मौसमी इन्फ्लुएंजा को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सतर्क किया है। फ्लू जैसे लक्षणों को हल्के में लेने के बजाय समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेने पर जोर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमण की रोकथाम के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के साथ स्वास्थ्य संस्थानों को आवश्यक तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए हैं।मुख्य चिकित्सा अधिकारी ऊना डॉ. संजीव वर्मा ने लोगों से अपील की है कि वे व्यक्तिगत स्वच्छता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और बुखार, खांसी अथवा सांस से जुड़ी परेशानी जैसे लक्षण सामने आने पर लापरवाही न बरतें। उन्होंने कहा कि सावधानी, समय पर पहचान और उचित उपचार के जरिए संक्रमण को गंभीर स्थिति तक पहुंचने से रोका जा सकता है।खांसी-छींक से फैल सकता है संक्रमणडॉ. वर्मा ने बताया कि स्वाइन फ्लू इन्फ्लुएंजा वायरस-ए के एच1एन1 स्ट्रेन से होने वाला संक्रमण है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या थूकने से निकलने वाली बूंदों के संपर्क में आने से संक्रमण दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। ऐसे में भीड़भाड़ वाले स्थानों पर विशेष सावधानी बरतना और व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।तेज बुखार से लेकर सांस की तकलीफ तक, इन संकेतों को न करें नजरअंदाजस्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखाई दे सकते हैं। तेज बुखार, खांसी, बलगम, पूरे शरीर में दर्द, अत्यधिक थकान, ठंड लगना और कंपकंपी इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। इसके अलावा लगातार छींक आना, तेज सिरदर्द, छाती में भारीपन और सांस लेने में परेशानी भी गंभीर संकेत हो सकते हैं।स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि फ्लू जैसे लक्षणों को केवल सामान्य वायरल समझकर घर पर लंबे समय तक नजरअंदाज करना उचित नहीं है। खासकर जब लक्षण लगातार बने रहें या सांस लेने में कठिनाई बढ़ने लगे तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।बच्चे, गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग रहें खास सतर्कडॉ. वर्मा ने बताया कि पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों तथा मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को भी फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।छोटी सावधानी, बड़ा बचावस्वास्थ्य विभाग ने लोगों से खांसते और छींकते समय मुंह-नाक को रूमाल या टिशू से ढकने की अपील की है। हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोते रहें तथा बार-बार आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें। इस्तेमाल किए गए रूमाल और कपड़ों को अच्छी तरह धोकर सुखाने की भी सलाह दी गई है।फ्लू जैसे लक्षण होने पर स्कूल, कार्यालय अथवा सार्वजनिक स्थानों पर जाने से बचें। दूसरों से उचित दूरी बनाए रखें और अनावश्यक रूप से हाथ मिलाने या संपर्क में आने से परहेज करें। रोगी को पर्याप्त आराम देने तथा शरीर में पानी की कमी न होने देने पर भी विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है।अस्पतालों में दवाओं और जरूरी उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चितप्रदेश में मौसमी इन्फ्लुएंजा की निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने सभी स्वास्थ्य संस्थानों को फ्लू जैसे लक्षण वाले मरीजों तथा गंभीर श्वसन संक्रमण के मामलों की निगरानी और दैनिक रिपोर्टिंग के निर्देश दिए हैं।अस्पतालों में आवश्यक दवाओं, जांच किट, वीटीएम, पीपीई किट और एन-95 मास्क का पर्याप्त स्टॉक रखने के साथ गंभीर मरीजों के लिए बेड और वेंटिलेटर की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। विभाग का जोर संभावित मामलों की समय पर पहचान और जरूरत पड़ने पर तत्काल उपचार उपलब्ध करवाने पर है।भ्रांतियों से नहीं, जागरूकता से होगा बचाव : जतिन लालजिलाधीश ऊना जतिन लाल ने कहा कि जिले में स्वाइन फ्लू, स्क्रब टाइफस तथा अन्य जीवाणु और वायरस जनित रोगों से बचाव के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों का उद्देश्य लोगों को बीमारी के लक्षणों, बचाव के उपायों और समय पर उपचार के महत्व की जानकारी देना है।उन्होंने लोगों से स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी सावधानियों का पालन करने तथा बीमारी से जुड़ी किसी भी अफवाह या भ्रांति पर विश्वास न करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बीमारी से घबराने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है। लक्षण दिखाई दें तो देरी न करें और समय पर स्वास्थ्य संस्थान से संपर्क करें।स्वास्थ्य विभाग की अपीलसाफ-सफाई रखें • खांसते-छींकते मुंह ढकें • हाथ बार-बार धोएं • लक्षण होने पर भीड़ से बचें • समय पर डॉक्टर की सलाह लें

































