सम्मेलन का उदेशय विश्व भर के प्रख्यात वक्ताओं, वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, उद्योगपतियों, शिक्षाविदों, छात्रों तथा अन्य हितधारकों जो कि प्रोटिओमिक्स विषय पर अनुसंधान कर रहे हैं को एक साथ लाना है
करनाल, आशुतोष गौतम। (2 दिसंबर) राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान, करनाल में ‘प्रोटिऑमिक्स फॉर सिस्टम इंटिग्रेटेड बायो-ओमिक्स, वन हैल्थ एडं फूड सेफ्टीÓ विषय पर एक अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया । इस सम्मेलन का मुख्य विषय प्रोटिओमिक्स का मानव एवं पशु स्वास्थ्य तथा खाद्य सुरक्षा के इस्तेमाल पर था। इस सम्मेलन का अन्य उदेशय विश्व भर के प्रख्यात वक्ताओं, वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, उद्योगपतियों, शिक्षाविदों, छात्रों तथा अन्य हितधारकों जो कि प्रोटिओमिक्स विषय पर अनुसंधान कर रहे हैं को एक साथ लाना भी है। इस अवसर पर डा. टी. महापात्रा, सचिव एवं महानिदेशक ने इस बात पर प्रकाश डाला कि हाल के वर्षों में कृषि, पशु, मानव एवं पर्यावरण सहित जीवन के सभी पहलुओं में ओमिक्स मंच का महत्वपूर्ण योगदान देखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रोटिऑमिक्स विज्ञान को जीव विज्ञान में अगला कदम माना जाता है और इसमें ऊतक या कोशिका में प्रोटीन की पहचान और उनके कार्य, संरचना और संशोधनों का निर्धारण शामिल होता है। डा. महापात्रा ने आगे कहा कि प्रोटिओमिक्स के क्षेत्र में मुख्य उद्देश्य हैं सभी प्रोटीनों की पहचान करना, विभिन्न नमूनों में अंतर प्रोटीन अभिव्यक्ति का विश्लेषण उनके कार्य और सेलुलर स्थानीयकरण की पहचान और अध्ययन करके प्रोटीन की विशेषता और प्रोटीन इंटरैक्शन नेटवर्क को समझना। उन्होंने बताया कि प्रोटिऑमिक्स का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों जैसे कि नई दवा की खोज, किटाणुओ की प्रतिरोधक क्षमता जानना, बायोमार्कर की खोज आदि को समझने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों से विश्व समुदाय में और अधिक निकटता आएगी। इस अवसर पर, डॉ. जे. के. जेना, उप महानिदेशक ने कहा कि खाद्य सुरक्षा तथा स्वास्थ्य इस देश के हमेशा से ही मुख्य मुद्दे रहे है। उन्होने बताया की प्रोटिऑमिक्स का उपयोग मानव तथा पशु विज्ञान मे डायग्नोस्टिक क्षेत्र में की जाने की आवश्यकता है। उन्होंने इस मुद्दे पर जोर देते हुए कहा की प्रोटिओमिक्स की उपयोगिता एक आम आदमी तक पहुंचाने की आवसकता है। उन्होंने पशु विज्ञान के क्षेत्र में प्रोटिओमिक्स के संभावित अनुप्रयोगों के कुछ उदाहरण भी दिए जैसे कि गर्मी के तनाव के मार्करों की पहचान, गर्भावस्था का जल्दी पता लगाना आदि। डा.आर.आर.बी.सिंह, निदेशक भाकृअनुप.-राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान ने इस बात पर बल दिया कि इस सम्मेलन में प्रोटिऑमिक्स, कोशिका जीव विज्ञान, प्रणाली जीवविज्ञान तथा खाद्य सुरक्षा जैसे व्यापक अन्त: विषयों पर एक ही छत के नीचे एक ही स्थान पर अपने वैज्ञानिक विचारों का आदान-प्रदान करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि हमें प्रोटिऑमिक्स तथा प्रणाली जीव विज्ञान के उभरते क्षेत्रों में विचार विमर्श से नई दिशा प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि यह आयोजन राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वैज्ञानिक जिन्होंने प्रोटिओमिक्स शब्द दिया था वो भी इस सम्मेलन में भाग ले रहे हैं और उनका भी एक लेक्चर हम सबको सुनने को मिलेगा। प्रो. उत्पल टाटू, अध्यक्ष प्रोटिओमिक्स सोसायटी, भारत ने कहा कि इस प्रकार के सम्मेलनों का आयोजन एक वार्षिक कार्यक्रम है तथा राडेअनुसं में यह प्रोटिओमिक्स सोसायटी ऑफ़ भारत का 11वां सम्मेलन है। डा.ए.के.मोहन्ती, आयोजन सचिव ने कहा कि इस सम्मेलन में 10 से भी अधिक देशों के विभिन्न संगठनों के 400 से भी अधिक वैज्ञानिक, युवा शोधकर्ता एवं छात्र भाग ले रहे हैं। इस सम्मेलन में पोस्टर प्रदर्शन भी किए जाएंगे जहां युवा वैज्ञानिकों को श्रेष्ठ शोधपत्रो व पोस्टरों के लिए पुरस्कृत भी किया जाएगा।

































