खुद परिवारवाद की दलदल में फंसे राणा न सिखाएं धूमल को परिवारवाद, जिस थाली में खाते उसी में छेद करते हैं राणा
ऊना, 29 सितम्बर (जसवाल ): भाजपा नेता लखवीर सिंह लक्खी, राजीव कालिया,अजय ठाकुर,गोलडी चौहान,स्वराज टिकड़ा, दीदार सिंह, विनय सहोड़, संदीप शर्मा, विक्रम ठाकुर, दीपक जोशी, नीतीश खन्ना,गौरव ठाकुर तथा कुलवीर सिंह सहित कई अन्य भाजपा नेताओं ने सुजानपुर से कांग्रेस विधायक राजेन्द्र राणा पर पलटवार किया है। यहां जारी अपने बयान में भाजपा नेताओं ने राणा को मौकापरस्त एवं धोखेबाज नेता करार दिया है। राणा जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करने का काम करते हैं। भाजपा में रहे तो सत्ता सुख भोगा और बाद में उसी पार्टी को धोखा देकर कांग्रेस में शामिल हो गए। वीरभद्र सिंह की चाटुकारिता के जरिए अपना उल्लू सीधा करने वाले राणा ने कांग्रेस की पीठ में भी छुरा घोंपा और गुटबंदी को बढ़ावा दिया। कांग्रेस पार्टी में भी उनकी वजह से काफी रोष पनपा है। भाजपाइयों ने कहा कि कभी धूमल के पांव पकडक़र राजनीति में आए और उनकी गाड़ी में सवार होकर अपनी पहचान बनाने वाले राणा ने मौकापरस्ती की हदें पार की।
राणा को परिवारवाद की बात करना शोभा नही देता
भाजपाइयों ने कहा कि राणा कौन से परिवारवाद की बात अब कर रहे हैं। पहले खुद चुनाव लड़ा और फिर कांग्रेस टिकट पर सुजानपुर क्षेत्र से पत्नी को चुनाव लड़वाया। चुनाव में पूरी तरह शिकस्त के बाद राणा ने खुद कांग्रेस टिकट हासिल की। लोकसभा चुनावों में अपने पुत्र अभिषेक राणा को टिकट दिलवाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाया। उन्होंने कहा कि खुद परिवारवाद की दलदल में धंसे राणा प्रदेश के प्रदेश जनजायक नेता धूमल को परिवारवाद की परिभाषा न समझाएं। एच.पी.सी.ए. को पहचान दिलवाने में अनुराग ठाकुर की सबसे बड़ी भूमिका है। मौकापरस्त राणा के दिलो दिमाग पर छाए वीरभद्र तो 6 बार मुख्यमंत्री बनने के बावजूद भी एक स्टेडियम भी नहीं बनवा पाए। अनुराग ठाकुर ने तो अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम दिया और प्रदेश में क्रिकेट के कई आयाम स्थापित किए। पूरे विश्व में प्रदेश को क्रिकेट की वजह से अनुराग ठाकुर ने ही पहचान दिलवाई है।
भाजपाइयों ने कहा कि विधायक बने राणा बताएं कि उनकी पत्नी जिसको चुनाव में टिकट दिलवाया गया और उसके बाद उनके पुत्र जिसे वह कांग्रेस में स्थापित करने में लगे हुए हैं उनका प्रदेश और हमीरपुर के लिए क्या योगदान है। राणा केवल धोखेवाज और चालबाज नेता हैं जो केवल अपना स्वार्थ सिद्ध कर विभिन्न पार्टियों को बेवकूफ बनाने का कार्य करते हैं। धूमल के पांव पकडक़र राजनीति की ए.बी.सी. सीखने वाले राजेन्द्र राणा का अब आने वाले समय में राजनीति में कोई स्थान नहीं होगा।






























