बचाव में आए जटाऊ हुए वीरगति को प्राप्त
करनाल, आशुतोष गौतम (3 अक्तूबर) नगरखेडा जुंडला के समीप जय श्री राम आश्रम में श्री शिव कलब की ओर से सीता हरण पर आधारित मनमोहक दृष्यों का सुदर ढंग से मंचन किया गया। कलाकारों ने मारीच-रावण संवाद, पंचवटी में लक्ष्मण रेखा, साधु वेष में रावण का पंचवटी में आना, सीता हरण, जटाऊ वध, राम-हनुमान भेंट और बाली वध जैसे रोमांचित दृश्यों का मंचन किया गया। कलाकार अमर सिंह ने राम, रमेश जांगडा ने लक्ष्मण, सतपाल प्रजापत ने सीता, नाथूराम ने अगंद, राजेंद्र ने हनुमान, रघु ने बाली, रामफल ने सुग्रीव, रजत ने जटाऊ, विजय वे तारा, डायरैक्टर कृष्ण लाल कश्यप, वाईस डायरैक्टर सतीश शर्मा ने लंकापति रावण का शानदार अभिनय करके अपनी कला की प्रतिभा की प्रस्तुति दी। दुनिया के बखेड़ों से दूर मारीच अपनी जिंदगी सुख से जी रहा है। बहन के अपमान की ज्वाला में क्रोधित लंकापति रावण प्र्रतिशोध लेने के लिए सीता हरण की योजना में मारीच को राजदार कर लेता है। पंचवटी से राम और लक्ष्मण को स्वर्ण मृग की तलाश में जाने को मजबूर कर देता है और स्वयं साधु वेष में आकर सीता को लक्ष्मण रेखा से बाहर निकालने में कामयाब हो जाता है। सीता द्वारा नारी जाति पर अपमान की दुहाई देते हुए भला बुरा कहने पर लंकेश रावण कहता है कि जब बहन संपूर्णनखा को बेईज्जत किया गया था तो उस समय नारी जाति के सम्मान को बचाने के लिए सीता ने हाथ नहीं बढ़ाए। एक नारी का अपमान दूसरी नारी के सामने होगा तो ऐसे ही भयंकर परिणाम होंगे। रक्त के दरिया यूं ही बहेंगे। रावण की भयंकर इस गर्जना पर दर्याक रोमांचित हो उठे और तालियोंं के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर कमेटी प्रधान विनोद शर्मा, प्रबंधक सुरेश शर्मा, सतबीर लोहट, सोनू शर्मा, उपप्रधान रामफल वाल्मीकि, सचिव दिनेश तंवर, अनिल कुमार, सोनू शर्मा, मुकेश भारद्वाज, रामलाल शर्मा, अमित चनालिया, अनिल भारद्वाज, कुलदीप शर्मा, आदि ने मुख्य रूप से अपनी जिम्मेवारी का निर्वहण किया।

































