रविवार को भी खुलेंगे कृषि विभाग के दफ्तर, विशेष गिरदावरी के लिए मुख्यमंत्री से अनुरोध
करनाल, आशुतोष गौतम (14 मार्च ) हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं निदेशक डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि बरसात के कहर के चलते किसानों पर आए संकट का सामना करने में सरकार द्वारा हर संभव मदद की जाएगी। आज और कल जिले के अलग-अलग भागों में बरसात और ओलावृष्टि से हुए नुकसान को लेकर करनाल के कृषि उपनिदेशक डॉ आदित्य डबास से वीडियो कांफ्रेंस के जरिए चर्चा के उपरांत यहां जारी एक वक्तव्य में डॉक्टर चौहान ने यह टिप्पणी की। डॉ चौहान ने कहा कि जिन किसानों की फसल का बीमा हुआ है बरसात के 72 घंटे के भीतर कृषि विभाग के कार्यालयों में निर्धारित प्रपत्र पर इसकी जानकारी अवश्य दें। उन्होंने बताया कि शुक्रवार तक जिले के 2000 किसानों ने विभाग के कार्यालय में बरसात से अपनी फसल खराब होने की जानकारी दर्ज कराई थी। किसानों की सुविधा के लिए जिले के सभी खंड कृषि कार्यालय शनिवार को खुले रहे और रविवार को भी वहां किसानों के आवेदन स्वीकार करने के लिए कर्मचारियों को तैनात रहने के निर्देश सरकार की ओर से दिए गए हैं। डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि शनिवार को असंध, इंद्री व नीलोखेड़ी विधानसभा में फसल को भारी नुकसान होने की प्रारंभिक जानकारी प्राप्त हुई है। कृषि विभाग के विशेषज्ञ और स्वयं किसान यह दावा कर रहे हैं कि पिछले 30 वर्ष के दौरान मार्च माह में इतनी बरसात कभी नहीं हुई और इस बेमौसमी बरसात ने अन्नदाता को परेशानी में डाल दिया है। चौहान ने कहा कि किसानों की यह परेशानी सरकार बखूबी समझती है और पहले की तरह सरकार संकट की इस घड़ी में उनके साथ मजबूती के साथ खड़ी रहेगी। हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि जिले में लगभग 30 फ़ीसदी गेहूं की फसल प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत बीमित है। बीमित फसल को हुआ नुकसान बीमा कंपनियों द्वारा वहन किया जाना है। किसानों को बीमा राशि प्राप्त करने के लिए नुकसान के 72 घंटे की अवधि में कृषि विभाग के कार्यालयों के माध्यम से निर्धारित आवेदन पत्र पर अपने नुकसान का दावा पेश करना है। कृषि विभाग द्वारा ऑनलाइन बीमा कंपनियों को अग्रेषित किया जाएगा और सूचना प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर बीमा कंपनियों और विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर नुकसान का प्रत्यक्ष जायजा लेंगे। इसी आधार पर किसानों के नुकसान के क्लेम का निपटारा किया जाना है। उन्होंने किसानों का आवाहन किया कि वे निर्धारित आवेदन फार्म पर बरसात या ओलावृष्टि से होने वाले नुकसान का कारण सहित विवरण भरकर कृषि विभाग के कार्यालयों में जमा करें। आवेदन पत्र जमा करते समय संबंधित विभागीय अधिकारियों से रसीद लेना न भूलें क्योंकि रसीद के अभाव में आवेदन पत्र खो जाने पर अदाओं का निपटारा संभव नहीं हो सकेगा। डॉ चौहान ने बताया कि उन्होंने आज ही राज्य के मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री को ईमेल जिले में बरसात और ओलावृष्टि के कारण हुए नुकसान की विशेष गिरदावरी कराए जाने की मांग भी की है। उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने अपनी फसल का बीमा नहीं करवाया है उन्हें विशेष गिरदावरी के आधार पर ही मुआवजा मिल सकेगा।
































