“सत्ता में कांग्रेस का विधायक, सरकार भी कांग्रेस की—फिर कुटलैहड़ की सड़कें क्यों गड्ढों में?” पूर्व मंत्री ने पूछा सवाल; बोले- जनता को अब आश्वासन नहीं, सड़कों पर काम चाहिए
डॉ रणधीर जसवाल, ऊना। कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र की बदहाल सड़कों को लेकर प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर पूर्व मंत्री एवं वॉलीबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेंद्र कंवर ने जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के करीब चार वर्ष के कार्यकाल ने कुटलैहड़ की सड़क व्यवस्था को पीछे धकेल दिया है। सड़कें टूट रही हैं, गड्ढे बढ़ रहे हैं और जनता की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन सरकार और स्थानीय कांग्रेस नेतृत्व आंखें मूंदकर बैठे हैं।वीरेंद्र कंवर ने कहा कि कुटलैहड़ में आज हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग सड़क पर सफर नहीं कर रहे, बल्कि गड्ढों के बीच रास्ता तलाश रहे हैं। बरसात ने बदहाल सड़कों की तस्वीर और भी भयावह कर दी है। कई जगह सड़कें उखड़ चुकी हैं, बड़े-बड़े गड्ढे दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं और संपर्क मार्गों की हालत ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है।उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है और कुटलैहड़ में भी कांग्रेस का विधायक है, तो फिर जनता अपनी सड़कों के लिए किसके दरवाजे पर जाए? उन्होंने कहा कि सत्ता में आने से पहले विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाले कांग्रेस नेताओं को अब धरातल पर जनता को जवाब देना चाहिए।भाजपा कार्यकाल में बनी सड़कें, कांग्रेस राज में बदहाली की शिकारपूर्व मंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में कुटलैहड़ में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए व्यापक स्तर पर काम किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्य मार्गों से जोड़ा गया और अनेक संपर्क सड़कों का निर्माण एवं सुधार करवाया गया।उन्होंने कहा कि जिस कुटलैहड़ में भाजपा शासन के दौरान सड़क संपर्क को मजबूत करने के लिए लगातार काम हुआ, आज उसी क्षेत्र में सड़कों की मरम्मत तक के लिए जनता को इंतजार करना पड़ रहा है। यह सरकार की प्राथमिकताओं और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।गड्ढों में फंसा कुटलैहड़ का विकासवीरेंद्र कंवर ने कहा कि सड़कें केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा हैं। खराब सड़क का सीधा असर किसानों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों, व्यापारियों और मरीजों तक पड़ता है।उन्होंने कहा कि टूटी सड़कों के कारण वाहन चालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है। बरसात के मौसम में कई मार्गों की हालत और खराब हो जाती है, लेकिन इसके बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस और स्थायी व्यवस्था नजर नहीं आ रही।उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है? उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना होने के बाद मरम्मत करवाने की बजाय सरकार को पहले ही जर्जर सड़कों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित बनाना चाहिए।सड़कें बदहाल तो परिवहन व्यवस्था भी सवालों के घेरे मेंवीरेंद्र कंवर ने कहा कि कुटलैहड़ के कई ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क सुविधा होने के बावजूद पर्याप्त बस सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं। अनेक रूटों पर नियमित बसों की कमी के कारण लोगों को निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।उन्होंने कहा कि सरकार सड़क और बस सेवा—दोनों मोर्चों पर विफल साबित हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों, कर्मचारियों, महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है।“चुनाव में वादे, सत्ता में आने के बाद जनता से दूरी”पूर्व मंत्री ने कांग्रेस सरकार पर चुनावी वादों को पूरा न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव के समय जनता से विकास और सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे किए गए थे। लेकिन सत्ता में आने के बाद जनता की मूलभूत समस्याएं प्राथमिकता से बाहर हो गईं।उन्होंने कहा कि कुटलैहड़ की जनता अब सवाल पूछ रही है कि चार साल में सरकार ने क्षेत्र की कितनी सड़कों की मरम्मत करवाई, कितने नए संपर्क मार्ग बनाए और कितने ग्रामीण रूटों पर नियमित बस सेवा शुरू की?उन्होंने सरकार से मांग की कि कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र की सभी प्रमुख एवं संपर्क सड़कों का तत्काल सर्वे करवाकर जर्जर मार्गों की सूची तैयार की जाए और प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत व टारिंग का काम शुरू किया जाए। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित बस सेवाएं बहाल एवं विस्तारित की जाएं।“अब चुप नहीं बैठेगी जनता, जरूरत पड़ी तो सड़कों पर होगा संघर्ष”वीरेंद्र कंवर ने प्रदेश सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि जनता की सहनशीलता की परीक्षा न ली जाए। यदि जल्द सड़कों की स्थिति में सुधार नहीं किया गया तो कुटलैहड़ की जनता को साथ लेकर सरकार के खिलाफ निर्णायक संघर्ष शुरू किया जाएगा।उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो जनता सड़कों पर उतरेगी, धरने-प्रदर्शन होंगे और चक्काजाम जैसे कड़े कदम भी उठाए जाएंगे। इसके बाद पैदा होने वाली स्थिति के लिए प्रदेश सरकार स्वयं जिम्मेदार होगी।वीरेंद्र कंवर ने कहा कि कुटलैहड़ की जनता को अब कागजी घोषणाएं और राजनीतिक बयान नहीं चाहिए। उसे चाहिए सुरक्षित सड़क, बेहतर संपर्क और नियमित परिवहन। सरकार को समझना होगा कि सड़कें किसी पार्टी की राजनीति नहीं, बल्कि जनता के अधिकार और क्षेत्र के विकास की बुनियादी जरूरत हैं। उन्होंने कहा कि कुटलैहड़ की सड़कें अगर गड्ढों में हैं तो सरकार के विकास के दावे भी उन्हीं गड्ढों में दिखाई दे रहे हैं।




























