संस्कृत भारती ने संस्कृत को जन भाषा बनाने के लिए विशाल शोभायात्रा निकाली
Rajeev, Bangana ( 10 जनवरी ) हिमाचल प्रदेश संस्कृत भारती ने संस्कृत को जन भाषा बनाने के लिए एक विशाल शोभायात्रा निकाली। यह शोभायात्रा ऊना रेलवे स्टेशन से पुराने बस स्टैंड होते हुए एम सी पार्क तक गयी। पुनः इसी क्रम से वापस हुई। शोभायात्रा में शामिल संस्कृत के छात्रों ने संस्कृत में अनेक प्रकार के गीत गाए और नाटी भी प्रस्तुत। संस्कृत में नाटी देखकर विशाल जनसमूह स्वाभाविक रूप से उनका गीत और नृत्य देखने उपस्थित हो गए। ज्ञातव्य है कि बी एड कालेज समूर में पिछले 10 दिनों से संस्कृत भारती ने संस्कृत संभाषण का वर्ग लगाया हुआ है, जिसमें संस्कृत के अनुरागियों को अत्यंत सरल रूप एवं व्यावहारिक माध्यम से संस्कृत बोलना सिखाया गया है। जितने भी छात्र शोभायात्रा में शामिल थे वे सभी संस्कृत में ही बातचीत कर रहे थे। शोभा यात्रा के संयोजक बृजमोहन शास्त्री ने बताया की संस्कृत समाज में सब जगह व्यापक हो, लोगों को संस्कृत के महत्व से परिचित कराना इस शोभा यात्रा का उद्देश्य था। शोभायात्रा में शामिल हि.प्र. संस्कृत भारती के शास्त्रोत्कर्ष प्रकल्प के संयोजक डा. कृष्णमोहन पांडेय ने बताया कि संस्कृत अत्यंत सरल भाषा है, समाज में यह गलत धारणा फैली हुई है कि संस्कृत बहुत कठिन है इसलिए लोग उसे नहीं पढ़ते हैं, संस्कृत बहुत ही सरल भाषा है जिसका प्रमाण ये छोटे-छोटे छात्र यहां प्रस्तुत कर रहे हैं। यह सभी छात्र ऊना बिलासपुर हमीरपुर कुल्लू मंडी आदि जिलों से आए हैं। देखने में बहुत छोटे हैं और इन सभी को 10 दिन के प्रशिक्षण के बाद ये सभी संस्कृत में आपस में बातचीत करते हैं।
शोभायात्रा में अनेक लोगों ने उनसे बातचीत की किन्तु शोभायात्रा में शमिल संस्कृतज्ञों ने संस्कृत में ही जवाब दिया। रास्ते पर चलने वाले जन समूह को बहुत आनन्द भी आ रहा था कि इतने छोटे बच्चे संस्कृत में सारी बात कर रहे हैं। प्रत्यक्ष दर्शियों ने बताया कि उन्हें भी संस्कृत बहुत पसंद है, संस्कृत का महत्व तो हम सभी जानते हैं किंतु संस्कृत को अपने जीवन में नहीं अपना रहे हैं। अतः इस शोभायात्रा के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया गया है कि आम व्यक्ति भी संस्कृत लिख बोल और पढ़ सकता है, संस्कृत को अपने जीवन में उतार सकता है। संस्कृत को जीवन में उतारने से भारतीयता हमारे चरित्र में आती है। जिससे भारतीय संस्कृति की पहचान बनती है। पूरे विश्व में भारत की पहचान भारतीय संस्कृति के कारण है और भारतीय संस्कृति को पुनःस्थापित करने के लिए संस्कृत ही एकमात्र साधन है। यही बताने के लिए हमने यह शोभायात्रा निकाली है। इस शोभायात्रा में संस्कृत के 120 छात्र थे जिन्होंने प्रशिक्षण लिया है। उनके साथ ही कुछ संस्कृत के शिक्षक भी हैं जो प्रशिक्षण देते हैं। उनकी उम्र भी बहुत कम है। इस शोभायात्रा में डा. ज्योति, नीरज, कृष्ण कुमार, हिमांशु, पुष्पराज, केवल, प्रियंका, शिवानी, कमलेश आदि शामिल थे। छात्रों ने बातचीत में बताया कि इस शोभायात्रा में विशाल जनसमूह भी हमारे साथ चल रहा है यहां के लोगों का बहुत समर्थन मिला है। अतः इस शोभायात्रा में समर्थन देने वाले ऊना के लोगों का धन्यवाद करते हैं। जयराम ठाकुर सरकार ने संस्कृत को हिमाचल की द्वितीय राजभाषा घोषित की इसके लिए हम संरकार का धन्यवाद भी करते हैं
































