केवल सच्ची भक्ति से ही मिल सकते हैं भगवान: आचार्य तरुण डोगरा

ऊना, 22 नवंबर ( जसवाल) उपमण्डल ऊना की ग्राम पंचायत झम्बर में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के छठे दिन कथा व्यास आचार्य श्री तरुण डोगरा जी ने प्रवचनों की अमृत वर्षा करते हुए कहा कि इस घोर कलिकाल में मनुष्य को अपने आप कुसंगतियों से विशेष सावधान रहने की आवश्यकता है जिनमें जुआ (ताश) मदिरापान , धूम्रपान, परस्त्री गमन, हिंसा, छल, चोरी धोखे से कमाया हुआ धन यह सब नाशकारी व इस मानव जाति के पतन का मुख्य कारण है। कथा व्यास पूज्य तरुण जी ने कहा कि यह स्थान राजा परीक्षित द्वारा कलयुग को दिया हुआ है। उन्होंने कहा कि कलयुग वहां पर अवश्य ही निवास लेता है जहां भागवत कथा होती है और जहां अन्य पुराणों की कथा चलती है वहां कलयुग भी भक्तों की भक्ति में बैठता है और कथा में बैठने वालों को देखकर उनकी सराहना करता हुआ उन्हें अलौकिक सुखों से संपन्न बनाता है उन्होंने कहा कि कलयुग के बराबर कोई युग नहीं है इसमें यदि हम भगवान के प्रति विश्वास पूर्वक समर्पित होते हुए कीर्तन व भगवान का भजन करते हैं तो कलयुग दोषों की निधि पर कलयुग, कलयुग नहीं अपितु करयुग है इसलिए मनुष्य को अत्यंत सावधान रहते हुए भागवत के कीर्तन में लग जाना चाहिए।
चौथे, पांचवें व छठे दिवस की कथा में पूज्य आचार्य तरुण डोगरा जी ने विदुर प्रसंग, सृष्टि के निर्माण का प्रसंग, श्री ध्रुव जी महाराज का चरित्र, श्री प्रहलाद जी महाराज का चरित्र, वामन अवतार की कथा, श्री कृष्ण जन्म, भगवान श्री कृष्ण द्वारा गोकुल निवासियों की रक्षा हेतु गोवर्धन पर्वत उठाना, भगवान श्री कृष्ण द्वारा गोपियों के साथ रास लीलाएं करना, घमंडी मामा कंस का वध और अपने माता-पिता वासुदेव और देवकी को कारागार से मुक्त करवाना इत्यादि सैकड़ों की तादाद में बैठे श्रद्धालुओं को विस्तार से बताया गया। जिसमें समाज को संदेश देते हुए यह कहा गया कि विश्वास हो तो ध्रुव जैसा भक्ति हो तो प्रह्लाद जैसी और त्याग हो तो राजा बलि जैसा। आचार्य ने कहा आज हर एक व्यक्ति मात्र अपने स्वार्थ सिद्धि के पीछे दौड़ा है लेकिन वह भगवान को भूल चुका है जो कि विश्व के लिए अच्छा संदेश नहीं है उन्होंने कहा कि अपने दिनचर्या के साथ-साथ हमें कुछ क्षण भगवान की पूजा के लिए भी निकालना उतना ही जरूरी है जितना हम अपनी रोजी रोटी के लिए मेहनत करते हैं उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा में भगवान ने कहा है कि कलयुग में अगर कोई भक्त मुझे एक बार पुकारेगा और अगर एक कदम मेरी ओर चलेगा तो मैं 10 कदम भक्तों की और आऊंगा। इस दौरान उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के भजनों से बैठे श्रद्धालुओं को नाचने के साथ-साथ रोने पर भी मजबूर कर दिया।
































