हर तकलीफजदा इंसान की आवाज है थिएटर वाला पागल है नाटक- संदीप साहिल
बीएचटी न्यूज, करनाल ( 3 दिसंबर) अभी कुछ दिन पहले महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री की कुर्सी का महाड्रामा हर किसी ने देखा, इस महाड्रामे की महाराष्ट्र से भी अधिक हरियाणा व अन्य प्रदेशों के राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी, हरियाणा में चर्चा का कारण इसलिए था क्योंकि हरियाणा व महाराष्ट्र के चुनाव साथ साथ हुए थे। हालांकि हरियाणा के राजनीतिक हालात महाराष्ट्र से भिन्न थे। खैर हम बात प्रसिद्ध अभिनेता मंगल ढिल्लन के क्रांतिकारी नाटक थिएटर वाला पागल है कि कर रहे हैं। निफा की ओर से डा. मंगलसेन सभागार करनाल में आयोजित इस नाटक को मैने अपने बहुत पुराने पत्रकार दोस्त आशुतोष गौतम के साथ देखा। यह नाटक आम नाटकों से कई गुणा भिन्न था इसमे मंगल ढिल्लन ने एक्टर, डॉयरेक्टर, लेखक , प्रोडयूसर वो सब दिखाया, अभिनीत किया जो आम व्यक्ति अंतर्मन में सोचता है। एक आम थिएटर कलाकार जिसके पास कला के सिवाय दूसरी कोई पूंजी नहीं होती, उसके हालात को तो दिखाया गया ही है, साथ में वर्तमान सत्ताधारियों और पूंजीपंतियों के हवाले से उन लोगों की मानसिकता पर भी कटाक्ष किया गया है जो मालदार होते हुए भी अपनी जेब से कुछ पैसे कला या समाज के उस जरूरतमंद तबके के लिए नहीं निकालते जिसे उसकी सबसे अधिक जरूरत होती है। यह नाटक इसलिए भी दिल को छूता है क्योंकि इसमे जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई कि यह संसार जरूरत का है, हम सभी दोगला जीवन जी रहे हैं, सच बोलना बहुत मुश्किल है क्योंकि सच की कीमत बहुत अधिक है। यदि आपके पास पोजिशन या रुतबा बड़ा है तो सभी आपके साथ होंगे, यानी वक्त आपके साथ है तो फिर हर कोई आपके साथ है। जीवन में जुगाड़ की क्या भूमिका है, एक अच्छा खासा काबिल इंसान कैसे नौकरी व काम के लिए मारा मारा फिरता है और जुगाड़ी कैसे हर काम में अपनी सैटिंग बिठा लेता है। बुनियाद फेम मंगल ढिल्लन की नाटक से पहले की गई यह अपील कि इसे केवल अक्लमंद व मेच्योर लोग ही देखें और जो इस कैटेगिरी के नहीं है वो बाहर चले जाएं भी यह कहने का प्रयास है कि अच्छी कैटेगिरी को पसंद करने वाले लोग भी कम ही रह गए हैं। वर्तमान राजनीति और राजनीतिक सोच को एक जूते में दिखाकर लोगों के वोटों से नेता किस तरह खेलते हैं और जनता को आखिर में क्या मिलता है आदि कई सवाल इसमे ऐसे हैं के आम दर्शक हर डायलॉग पर यह सोचता है कि अरे यह तो हमारे ही दिल की बात कर रहा है। कलाकार, पत्रकार, लेखक व किसी भी विधा में अब क्या क्या दिक्कतें और परेशानियां आ रही हैं और इस पेशे में औरत को क्या समझा जाता है सब कुछ क्लियर तरीके से फिल्मांकन किया गया है। इस नाटक में वो बात भी कह दी गई है जो बात आज नाटककार, निदेशक व एक्टर कहते हुए डरते हैं। इसमे संदेश दिया गया है कि या तो आज का आदमी बिल्कुल खामोश रहकर सब कुछ सहता रहे, देखता रहे, मंगल ढिल्लन से ना तो मेरी कोई पहचान है और ना ही मैने हिट करने के उद्देश्य से यह राइटअप लिख रहा हूं, मेरा उद्देश्य तो केवल इतना है कि हम अच्छी चीजों की कद्र करना सीखें, उन हुनरमंद लोगों को पहचानें जो समाज के लिए कुछ अच्छा करने का जज्बा रखते हैं। हर आदमी अपना काम जिम्मेदारी से करे। दो घंटे के स्क्रीन पर दिखाए गए इस नाटक को सभी ने टकटकी लगाए देखा और देखने के बाद सोचने लगे कि शायद जिंदगी में ऐसा कुछ पहली बार देखा। थिएटर वाला पागल है एक तरह से जिंदगी की असलियत है जिसे हम जीते और भोगते दोनों हैं लेकिन बयां करते हुए डरते हैं। अपनी धर्मपत्नि श्रीमति रेशमा कल्याण के साथ खुद गाड़ी ड्राइव करके आए मुख्यअतिथि घरौंडा विधायक हरविंद्र कल्याण ने संजीदगी से अभिनेता मंगल ढिल्लन की मुक्तकंठ से तारीफ की, उन्होंने निफा चेयरमैन प्रितपाल पन्नू को अपना बहुत पुराना दोस्त बताते हुए उनके इस तरह के प्रयासों की सराहना की। निफा चेयरमैन प्रितपाल सिंह पन्नू ने कहा कि आप सबकी स्टैडिंग पोजिशन यह बताती है कि इस नाटक ने आपके दिल को छू लिया है। निफा महासचिव एडवोकेट नरेश बराना, निफा पदाधिकारी प्रवेश गाबा, आकाश भट्ट, राजीव मल्होत्रा ने मुख्यअतिथि हरविंद्र कल्याण का गर्मजोशी से स्वागत किया। अभिनेता मंगल ढिल्लन ने निफा चेयरमैन प्रितपाल पन्नू व उनकी टीम की तारीफ की। निफा के हारमनी 2019 के इस प्रयास में रूस सहित तीन देशों व कई राज्यों के 750 कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति दी, कलाकारों सहित हर वर्ग को यहां सम्मान मिला। निफा के नौ दिनों के कार्यक्रमों में सीएम मनोहर लाल भी आए, कैलाश खेर सहित कई हस्तियां भी।
कहना सच को सच है तो मुशिकल पर कह दिया मैने: मंगल ढिल्लन
फिल्म शहादत की तैयारी कर रहे अभिनेता, निदेशक, लेखक मंगल ढिल्लन ने खास बाचतीत में कहा कि सच को सच कहना है तो मुश्किल पर कह दिया मैने, इस नाटक को करने से पहले मैने 11 बीकॉम्पलेक्स इंजेक्शन, 5-7 हजार की आयुर्वेदिक दवा और 5 इलेक्ट्राल पाउडर पिए ताकि मैं इसमे वो सब कह सकूं जो एक आम व्यक्ति महसूस करता है। इस मुहिम को आगे बढाएगे।

































