बोले—रैलियों और दिखावे से नहीं रुकेगा चिट्टा, तस्करों के नेटवर्क पर हो निर्णायक प्रहार
हजारों बच्चों को धूप में खड़ा करने पर भी उठाए सवाल, बोले—बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ क्यों?
डॉ रणधीर जसवाल,ऊना। एंटी-चिट्टा अभियान के तहत ऊना में प्रस्तावित हजारों स्कूली बच्चों की रैली को लेकर भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष एवं ऊना सदर विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। सत्ती ने कहा कि नशे जैसी गंभीर सामाजिक समस्या का समाधान रैलियां निकालने, बच्चों को घंटों धूप में खड़ा करने और फोटो खिंचवाने से नहीं होगा। सरकार को धरातल पर उतरकर नशा तस्करी के पूरे नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई करनी होगी।सत्ती ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में सरकार पहले भी नशा विरोधी रैलियां और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर चुकी है। अब सरकार को जनता के सामने इसका हिसाब देना चाहिए कि इन रैलियों के बाद नशे की तस्करी कितनी कम हुई, कितने तस्कर पकड़े गए और कितने बड़े नेटवर्क को ध्वस्त किया गया। उन्होंने कहा कि यदि रैलियों से ही नशा खत्म होना होता तो हिमाचल में आज चिट्टे की समस्या इतनी गंभीर स्थिति में नहीं होती।
उन्होंने आरोप लगाया कि ऊना में नशे के कारोबार को राजनीतिक संरक्षण मिलने की चर्चाएं लगातार सामने आती रही हैं। सत्ती ने कहा कि नशा तस्करों और कुछ पुलिस कर्मचारियों के बीच कथित सांठगांठ को लेकर भी गंभीर सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि यदि वह वास्तव में नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही है तो तस्करों के साथ खड़े लोगों और उन्हें संरक्षण देने वालों पर कार्रवाई कब होगी?सत्ती ने कहा कि सरकार को मंचों से बड़े-बड़े दावे करने के बजाय पुलिस को स्पष्ट निर्देश देने चाहिए कि चिट्टा बेचने वालों से लेकर उनके पूरे सप्लाई नेटवर्क तक किसी को बख्शा न जाए। नशे के खिलाफ लड़ाई केवल जागरूकता तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि इसके लिए गिरफ्तारी, संपत्ति की जांच, नेटवर्क की पहचान और प्रभावशाली संरक्षण देने वालों पर कार्रवाई जरूरी है।
बच्चों को धूप में खड़ा करने की व्यवस्था पर सवाल– सत्ती ने एंटी-चिट्टा वॉकाथॉन में स्कूली बच्चों को शामिल करने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक तरफ सितंबर की गर्मी को देखते हुए स्कूलों की समय सारणी बदली जा रही है, दूसरी तरफ हजारों बच्चों को करीब चार घंटे तक बिना पर्याप्त छाया के मैदान में खड़ा रखने की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है या नहीं?उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ जागरूकता जरूरी है, लेकिन जागरूकता के नाम पर बच्चों को असुविधा और जोखिम में डालना किसी भी तरह उचित नहीं है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कार्यक्रम में शामिल होने वाले प्रत्येक बच्चे के लिए पर्याप्त छाया, पेयजल, चिकित्सा सुविधा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध हों। भाजपा विधायक ने मुख्यमंत्री के ऊना दौरे को लेकर बनाए गए ट्रैफिक प्रबंधों पर भी सरकार और प्रशासन को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊना दौरे के दौरान भी शहर में ऐसी स्थिति नहीं बनी कि आम लोगों की आवाजाही को पूरी तरह ठप करना पड़े। लेकिन मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर जिस तरह सड़क मार्गों को बंद करने की व्यवस्था की गई है, उससे आम जनता को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।सत्ती ने सवाल किया कि यदि इस दौरान किसी मरीज को अचानक अस्पताल पहुंचाने की जरूरत पड़ जाए तो आपातकालीन स्थिति के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की गई है? उन्होंने कहा कि प्रशासन को आम जनता, मरीजों, यात्रियों और व्यापारियों की परेशानियों को ध्यान में रखकर ट्रैफिक प्लान तैयार करना चाहिए था।उन्होंने कहा कि सड़क मार्ग बंद होने से स्थानीय दुकानदारों का कारोबार भी प्रभावित होगा। सरकार और प्रशासन को यह भी बताना चाहिए कि जिन व्यापारियों की रोजी-रोटी प्रभावित होगी, उनकी परेशानी का जिम्मेदार कौन होगा?
शिक्षकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी डालने का भी विरोध-सत्ती ने स्कूल शिक्षकों को बच्चों के लिए किराए की बसों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यदि सरकार और प्रशासन की ओर से इतना बड़ा आयोजन किया जा रहा है तो बच्चों को कार्यक्रम स्थल तक लाने और वापस ले जाने की समुचित व्यवस्था आयोजकों को स्वयं करनी चाहिए।उन्होंने कहा कि शिक्षकों का मुख्य दायित्व बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा है। उन पर बसों की व्यवस्था करने जैसी अतिरिक्त जिम्मेदारी डालना उचित नहीं है। सरकार को शिक्षकों पर अनावश्यक दबाव डालने के बजाय कार्यक्रम की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी स्वयं उठानी चाहिए।
“रैली नहीं, तस्करों पर कार्रवाई चाहिए”सत्ती ने कहा कि प्रदेश में नशे की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है और ऐसे समय में सरकार को इवेंट मैनेजमेंट से आगे बढ़कर एक्शन मोड में आने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जनता अब भाषण, रैलियां और फोटो से नहीं, बल्कि नतीजों से जवाब चाहती है।उन्होंने सरकार से सवाल किया कि अब तक आयोजित नशा विरोधी रैलियों के बाद कितने तस्कर गिरफ्तार हुए, कितने बड़े नेटवर्क पकड़े गए और नशे के कारोबार से जुड़े कितने लोगों की संपत्तियों पर कार्रवाई हुई?सत्ती ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में चिट्टे के खिलाफ गंभीर है तो उसे रैलियों की संख्या गिनाने के बजाय तस्करों की गिरफ्तारियों और ध्वस्त किए गए नेटवर्क का हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को रैली में खड़ा करके सरकार नशे के खिलाफ अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।सत्ती ने कहा कि हिमाचल की युवा पीढ़ी को चिट्टे के जाल से बचाने के लिए अब भाषण नहीं, बल्कि कठोर और निर्णायक कार्रवाई की जरूरत है। सरकार को रैलियों के दिखावे से बाहर निकलकर नशा तस्करों और उनके संरक्षण तंत्र पर सीधा प्रहार करना चाहिए।






























