दस दिन तक एकता और अखंडता का पाठ पढ़ाने के बाद बिदा कहा करनाल को
करनाल, आशुतोष गौतम ( 3 दिसंबर ) दस दिन करनाल को मिनी इंडिया के रूप में भाई चारा और विविधता में एकता की सौगात देने के बाद 28राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सैकड़ों प्रतिभागियों ने करनाल को अलविदा कर दिया। समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि घरौंडा के विधायक हरविंदर कल्याण थे। कार्यक्रम में निर्माता निदेशक करन राजदान और फिल्म अभिनेता मंगल ढिल् लो थे। उनके ग्रुप ने देश का सर्वाधिक लोकप्रिय नाटक सावधान नाटबाज पागल हैं का मंचन किया। आज प्रतिभागियों को सम्मानित किया। समापन कार्यक्रम में मुख्यअतिथि विधायक हरविंदर कल्याण ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए यह शिविर यादगार रहेगा। उन्होंने कहा कि दूरदराज से आए युवाओं ने करनालको आपसी बंधुत्व और प्यार की सौगात दी है। उन्होंने निफा की सराहना करते हुए कहा कि इस संस्था ने समरसता और कल्चर के आदान प्रदान की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया है7 उन्होंने कहा कि निफा की बजह से करनाल को इंटरनैशनल स्तर पर एक पहचान मिली है। उन्होंने करनाल की पहचान की चर्चा करते हुए कहाकि रनाल एक कच्रल हब बन चुकी हैं। इसके प्रदेश की सांस्कृतिक राजधाानी कहें तो अतिशयोक्ति कहें तो कम नहीं होगा। इस अवसर पर फिल्म अभिनेता मंगल ढिल्लो ने इस शिविर की सराहना करते हुए कहा कि यह आयोजन उनके लिए यादगार है। यह शिविर एकता में अनेकता का अनूठा उदाहरण है। इस अवसर पर निर्माता निदेशक करन राजदान ने भी अपनी बात कही। युवा महाकुंभ के समापन अवसर पर 24 राज्यों सेआए प्रतिभागियों को पुरुस्कृत किया गया। इस अवसर पर युवाओं को उनके द्वारा दी गई प्रस्तुतियों केआधार पर पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में जाने माने चिकित्सक नैत्र पाल रावल,नगरनिगम के डीएमसी धीरज कुमार, अकाश भट्ट ने भी अपनी बात रखी। इस अवसर पर अिितथयों का स्वागत निफा के प्रमुख प्रीतपल सिंह पन्नू, नरेश बराना, प्रवेश गाबा, मनेज गौतम ने किया।
समाजिक विसंगतियों पर करारा प्रहार किया नाटक ने: समाज की मौजूदा विसंगतियों पर नाटक सावधान नाटकवाज पागल हैं के माध्यम से कड़ा प्रहार किया। इस नाटकके विविध पात्रों को रंग कर्मियों ने सजीवता प्रदान की। इसमें समाज अज्ञैर देश के समक्ष चुनौँतियों को बेहतर ढंग से प्रस्तुत किया। नाटक के माध्यम से समाज में व्याप्त कई कुरीतियों को प्रदर्शित किया। कई बार भाव पूर्ण प्रसंगों ने उपस्थित दर्शकों को प्रभावित किया। नाटक मंचन के दौरान पात्रों ने लोगां को कई सच्चाई का अहसास कराया। मंगल ढिल्लों द्वार निर्देशित नाटक को देश के कई हिससों में मंति किया जा चुका है। इस नाटक ने देश ही नहीं बिदेशों में भी अपना स्थान बनाया है। इसमें पात्रों ने अपने सशक्त अभिनय के माध्यम से लोगों को भीतर तक झोझौर कर रख दिया।

































