छठी मईया के गीतों व भजन से माहौल गुंजायमान रहा
करनाल, आशुतोष गौतम ( 2 नवंबर ) महाछठ पर्व धार्मिक आस्था व उल्लास के साथ मनाया गया। पश्चिमी यमुना नहर पर व्रती महिलाओं ने संतान के सुख तथा समृद्धि के लिए डूबते सूर्य को अघ्र्य दिया। रविवार सुबह उगते सूर्य को अघ्र्य देकर पूजा का समापन होगा। महिलाएं अपने परिजनों के साथ घाट पर पहुंची। लोक परंपरा के अनुसार पूजा की गई। छठी मईया के गीतों व भजन से माहौल गुंजायमान रहा। समारोह में सांसद संजय भाटिया, मेयर रेणु बाला गुप्ता, जगमोहन आनंद, नगर परिषद के चेयरमैन रहे ज्ञान सिंह चावला व युवा नेता अमनदीप सिंह चावला ने शिरकत कर लोगों को पावन पर्व की बधाई दी। सांसद ने कहा कि त्यौहार हमें भाईचारे का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि सूर्य देव और छठी मैया आपकी मनोकामनाएं पूर्ण करें और सभी का भविष्य उज्जवल हो। सूर्य मंदिर के प्रधान सुरेश कुमार यादव ने कहा कि आज हजारों लोगों ने डूबते सूर्य को अघ्र्य देकर मनोकामनाएं मांगी। उन्होंने कहा कि छठ भगवान सूर्य की उपासना का महापर्व है। छठ पर्व ही एक ऐसा महापर्व है जिसे व्यापक स्तर पर मनाया जाता है। छठ पर्व लगातार चार दिनों तक पूरी आस्था और विश्वास के साथ मनाया जाता है। साथ ही छठ पर्व में कठोर नियमों का पालन करना होता है। उन्होंने कहा कि संतान प्राप्ति के लिए इस व्रत को बेहद लाभकारी माना गया है। ऐसा माना जाता है कि जिन्हें संतान प्राप्त नहीं हो रहा है उन्हें यह व्रत करने से संतान की प्राप्ति होती है। इसके अलावे जिन्हें संतान है वे भी संतान की लम्बी आयु के लिए इस व्रत को रखते हैं। ज्योतिषी के अनुसार जिनकी कुंडली में सूर्य अच्छी स्थिति में नहीं है उन्हें इस व्रत को करने से अत्यधिक लाभ होता है। छठ पर्व में अस्त होते सूर्य को अघ्र्य देने के पीछे बहुत पुरानी कथा है। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि डूबते सूर्य को अघ्र्य देने के साथ-साथ उगते हुए सूर्य को अघ्र्य देने से मनुष्य के जीवन की प्राय: सभी समस्याओं का समाधान हो जाता है।
असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है
छठ व्रत रखने वाले व्रतियों का मानना है कि इस व्रत को रखने से कुष्ट जैसे असाध्य रोग का समाधान होता है। साथ पाचन तंत्र की समस्या से परेशान लोगों को लाभ मिलता है। मान्यता के अनुसार जिनको भी संतान की ओर से किसी तरह की समस्या है तो यह व्रत उनके लिए लाभदायक होता है।

































