वर्चुअल संस्कृत सम्मेलन का हुआ आयोजन, जिला लोक संपर्क अधिकारी अरुण पटियाल रहे मुख्यतिथि
ऊना (24 अगस्त)- 19 से 25 अगस्त तक मनाए जा रहे संस्कृत सप्ताह के तहत आज एक वर्चुअल संस्कृत सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें जिला लोक संपर्क अधिकारी ऊना अरुण पटियाल ने मुख्यतिथि के रूप में शिरकत की। सम्मेलन में अरुण पटियाल ने कहा कि संस्कृत ज्ञान और विज्ञान दोनों की भाषा है। प्राचीन काल में जब कोई भाषा नहीं थी, तब इसी भाषा में लोक व्यवहार होता था। उन्होंने कहा कि संस्कृत में आज भी जितना साहित्य लिखा गया है, उतना साहित्य किसी और भाषा में नहीं लिखा गया है। संस्कृत का शब्द भंडार विश्व में सारी भाषाओं से सबसे अधिक है, जिसमें 102 करोड़ से अधिक शब्दों का भंडार है। जिला लोक संपर्क अधिकारी ने कहा कि समय आ गया है, जब अपनी प्राचीन पुरातन संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान, अध्यात्म और समस्त भौतिक उन्नति के साधनों को उपलब्ध कराने वाली इस भाषा को जानें व अपने जीवन में अपनाएं और भारत को श्रेष्ठ बनाने का प्रयत्न करें। वहीं कार्यक्रम में सनातन धर्म आदर्श संस्कृत महाविद्यालय डोहगी में वेद शास्त्र के विद्वान डॉ. कृष्णमोहन पांडेय मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित थे। उन्होंने कहा कि भारत संस्कृत के कारण ही विश्व भर में जाना जाता है। संस्कृत ने पूरी दुनिया को संस्कृति का पाठ पढ़ाया है। उन्होंने कहा कि मानव सभ्यता से लेकर पूरी प्रकृति से प्रेम करना तक संस्कृत ही सिखाती है, इसलिए हमें संस्कृत को अपने जीवन में अपनाने की जरूरत है । कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृत भारती ऊना के अध्यक्ष बृजमोहन शास्त्री ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि संस्कृत के बिना हमारा समाज संस्कारहीन होता जा रहा है, अतः बच्चों को बाल्यकाल से ही संस्कृत अवश्य पढ़ाया जाना चाहिए। समाज को सुदृढ़ और सुव्यवस्थित बनाने के लिए संस्कृत को जीवन में उतारना सबसे अधिक आवश्यक है। सम्मेलन में संस्कृत भारती के अन्य कार्यकर्ताओं ने श्लोक उच्चारण, गीतिका, भाषण, कहानी, लेखन, संस्कृत में बातचीत आदि के कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। इस कार्यक्रम का संचालन गणेश वशिष्ठ तथा शिवानी शर्मा ने किया। कार्यक्रम में डॉ. मुकेश कुमार, ललित शर्मा, हरीश शर्मा, हेमराज शर्मा, प्रीति हीरा, ज्योति सहित अन्य जुड़े।
































