नगर परिषद क्षेत्र में आवारा कुत्तों से परेशान शहरवासी, साफ सफाई, पथ प्रकार व सीवरेज से दुखी हर नागरिक-कौशल
बददी, 21 जनवरी ( शांति गौतम ) बददी सुधार सभा ने शहर की समस्याओं को लेकर एक अह्म बैठक 26 जनवरी सामुदायिक भवन में सुबह 11 बजे बुलाई है। सभा के अध्यक्ष एस कौशल ने बताया कि बैठक में सभी खुला निमंत्रण दिया गया है। इसमें नगर परिषद से जुड़ी समस्याओं को खुले मंच से उठाया जाएगा। इस बैठक में नगर परिषद के अधिकारियों को भी बुलाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि लोगों की ज्यादातर समस्याओं का मौके पर ही निदान करवाया जा सके। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र और नगर परिषद एरिया में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। हर कोई व्यक्ति नगर परिषद की कार्यशैली से परेशान है। उन्होंने कहा कि नगर परिषद की कार्यशैली में कोई बदलाव यदि निकट भविष्य में नहीं आता है तो धरने-प्रदर्शन भी किए जाएंगे। नगर परिषद की दशा बद से बदतर हो चुकी है। फेज-थ्री में तो अमरावती को जाने वाले रास्ते पर पैदल चलना भी दूभर हो गया है। स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चे टूटे-फूटे और कीचड़ से सनी गलियों में सुबह-सुबह बड़ी मुश्किल से इस रास्ते से गुजरते हैं। शहर में आवार कुत्तों का बड़ा आंतक बना हुआ है। रात में कोई जब ड्यूटी करके घर वापिस आता है तो उसे सबसे पहले आवारा कुत्तों के खौफ का सामना करना पड़ता है। इस मुद्दे को लेकर उपमंडल अधिकारी से लेकर नगर परिषद तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी को इन आवारा कुत्तों से निजात दिलाने के लिए बात हुई थी। उन्होंने भी एक ह ते में इसके समाधान भरोसा दिलाया था, लेकिन यह समस्या जस की तस बनी हुई है। आवारा कुत्ते स्कूटर-मोटर साइकिल वालों के पीछे भागते हैं। पैदल चलने वालों का क्या हाल होगा इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है। नगर परिषद की ज्यादातर नालियां टूटी हुई हैं या बंद पड़ी हैं। सडकों पर नालियों तथा सीवरेज का गंदा पानी बह रहा है। नगर परिषद द्वारा जो सफाई कर्मचारी रखे गए थे उन्हें भी दूसरी कंपनी में शि ट कर दिया गया है। नगर परिषद में सफाई व्यवस्था का जि मा सिर्फ 31 लोगों के ऊपर लाद दिया गया है। इनसे पूरे नगर परिषद एरिया को कवर करना मुश्किल हो रहा है। जिसके चलते नगर परिषद में आए दिन कूड़े-कचरे के ढ़ेर से हर ओर गंदगी देखी जा सकती है। कौशल ने आरोप लगाया कि इन कर्मचारियों की अदला-बदली करके नगर परिषद के लोग किसको लाभ पहुंचाना चाहते हैं। आखिर इन सफाई कर्मचारियों को क्यों दूसरी कंपनी में शि ट किया जा रहा है। नगर परिषद में स्थाई कार्यकारी अधिकारी होने से भी नप की कार्यप्रणाली में कोई बदलाव नहीं दिखा है। नगर परिषद के अधिकारियों व कर्मचारियों का स्थानीय लोगों से कोई सरोकार नहीं है। नगर परिषद में जब कुछ राम भरोसे ही चल रहा है। सुधार सभा के अध्यक्ष एस कौशल ने इन सभी समस्याओं को लेकर अपनी आवाज बुलंद करने का आह्वान किया है।
हाऊसिंग बोर्ड से पलायन कर रहे लोग- बददी सुधार सभा के अध्यक्ष संजीव कौशल ने आरोप लगाया कि पहले लोग यहां के हाऊसिंग बोर्ड और ऑमेक्स कॉलोनियों में आकर बसते थे, लेकिन अब इन कॉलोनियों में कोई भी रहना पसंद नहीं करता। लेकिन अब लोग चंडीगढ़ की ओर पलायन कर रहे हैं। कौशल ने दावा किया कि कम से कम 100 परिवार चंडीगढ़ शि ट कर गए हैं। यह बददी के लिए बहुत बड़ा दाग है। जो लोग बददी से चंडीगढ़ शि ट हुए हैं वो वहां जाकर बददी एरिया की बुराई करते हैं कि वहां गंदगी रहती है। साफ-सफाई की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा। सिर्फ हाऊस टैक्स तथा अन्य टैक्स अवश्य बसूले जा रहे हैं, लेकिन सुविधा के नाम सिर्फ कोरे आश्वासन ही दिए जाते हैं। इससे बददी नगर परिषद की छवि खराब हो रही है।
नगर परिषद में कोई बदलाव नहीं आया- बददी सुधार सभा के अध्यक्ष एस कौशल ने आरोप लगाया कि नगर परिषद में नई बीजेपी की कमेटी गठन के बावजूद अभी तक कोई बदलाव नहीं है। एक बदलाव अवश्य हुआ है कि अब अधिकारियों व कर्मचारियों में चुने हुए जनप्रतिनिधियों का डर खत्म हो गया है। पहले अधिकारी या कर्मचारी वार्ड के किसी भी पार्षद के एक फोन से तुरंत समस्या का हल कर देते थे, परंतु अब किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के कान पर जूं तक नहीं रेंगती। कौशल ने कहा कि 18 साल बाद बददी नगर परिषद में निजाम बदला है, लेकिन उनके और इनके कार्यकाल में कोई खास बदलाव अभी तक देखने को नहीं मिला है। नगर परिषद की हेल्पलाइन में लोग अपनी समस्याएं डालते हैं, लेकिन उन पर कोई कार्यवाई नहीं होती। नगर परिषद का सफाई ठेकेदार ही अधिकारियों से बस में नहीं है। सफाई ठेकेदार अपनी मनमर्जी से कार्य कर रहा है। वहीं इस सबंध में कार्यकारी अधिकारी रणवीर वर्मा ने कहा कि नप लोगों की हर समस्या का निदान करने में जुटी है। अगर किसी भी प्राणी को कोई दिक्कत है तो वह कभी भी कार्यालय में आकर लिखित में दे सकता है हम उसका निराकरण करने की कोशिश करेंगे। वहीं चेयरमैन नरेंद्र ने कहा कि हमें कार्यभार संभाले एक साल हुआ है और यहां कांग्रेस का 18 साल शासन रहा जिसको सुधारने में वक्त तो लगेगा।
































