उद्योग के वैद्य लायसेंस को अवैध बता बिजली काटने का आरोप, लघु उद्योग भारती प्रदेश उपाध्यक्ष को बताई सारी समस्याएं
बोले-बोर्ड से दुखी होकर अब कांगडा में नहीं लगाएंगे उद्योग
बीबीएन 23 अक्तूबर (शांति गौतम) एक तरफ तो प्रदेश सरकार धर्मशाला में इनवेस्टर मीट करके नए उद्योगों को बुला रही है लेकिन यहां पर पहले से कार्यरत उद्योगों को प्रदूषण का डंडा दिखाकर उजाडने में कोई कोर कसर नहीं छोड रही। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक दशक से बददी में चल रहे फार्मा उद्योग की अकारण ही बिजली काटने के निर्देश दे दिए जबकि यह उद्योग एक दशक से यहां पर सफलतापूर्वक काम करके दर्जनों लोगों को रोजगार उपलब्ध करवा रहा है। जब बोर्ड नहीं माना तो कंपनी ने कोर्ट से स्टे ले ली और बिजली काटने से बच गया। यह कंपनी इन्वेस्टर मीट के तहत कांगडा में अपना दूसरा कारखाना लगाना चाहती थी जिसका विचार बोर्ड की कार्यप्रणाली के बाद अब उन्होने पूरी तरह त्याग दिया है और दिल्ली में ही यूनिट लगाने का निर्णय लिया है। बददी में लघु उद्योग भारती के वरिष्ठ उपप्रधान नेत्र प्रकाश कौशिक को अपना दुखडा सुनाते हुए बॉास फार्मा कंपनी के निदेशक पंकज नंदवाना व महाप्रबंधक राजेश भारद्वाज ने कहा कि गत दिनों बोर्ड के अधिकारियों ने उनकी कंपनी का औचक निरीक्षण किया और कहा कि आपके पास वैद्य लॉयसेंस नहीं है और आपका यूनिट आरेंज की बजाय रैड कैटेगरी में आता है इसलिए आपके यूनिट में कुछ कमियां है और जब तक आप उनको दूर नहीं करते तब तक आपकी बिजली काटी जानी जरुरी है। पकंज नंदवाणा ने कहा कि हमारा यूनिट नियमों व मानकों की शुरु से ही पालना करता आया है और हमारे पास बोर्ड का दिया हुआ ही 2022 तक का वैद्य लायसेंस है। हमने सब फीसें भरी हुई है और हमने सात लाख रुपये खर्च करके सीईटीपी का कनेक्शन भी लिया हुआ है। हर साल लगभग अढ़ाई लाख रुपये सीईटीपी ट्रीटमेंट प्लांट को अपने जल को शोधित करने के लिए भी देते हैं।
प्रदूषण बोर्ड का रवैया गलत-कौशिक
उद्यमी की समस्याएं सुनने के बाद लघु उद्योग भारती के प्रदेश वरिष्ठ उपप्रधान नेत्र प्रकाश कौशिक ने कहा कि बोर्ड का काम उद्योगों को चलाना है न कि बंद करवाना है। अगर किसी उद्योग में छोटी मोटी कमी है तो उसको दूर करवाया जाए न कि बिना कुछ कारण उनकी बिजली ही काट दी जाए। उन्होने कहा कि मंदी की दौर में ऐसी कार्यवाही प्रदूषण बोर्ड की धक्केशाही को दर्शाता है जो कि लघु उद्योग भारती बर्दाशत नहीं करेगी। उन्होने कहा कि सीएम दूसरे राज्यों में जाकर निवेश ला रहे हैं जबकि यहां के अधिकारी उद्योगों को उजाड रहे हैं। उन्होने कहा कि इस मामले की न्यायिक जांच होनी चाहिए।
जबरन ओरेंज से रैड कैटेगरी में डाला जा रहा-
कंपनी के मालिक पंकज नंदवाणाने कहा कि हमें बददी के कुछ अधिकारियों द्वारा जबरन दबाव डालकर कहा जा रहा है कि आपका यूनिट रैड श्रेणी में आता है इसलिए इसको ओरेंज से रैड में करना पडेगा। उन्होने कहा कि हमें सिर्फ टारगेट किया जा रहा है जबकि हम बिजली, पानी के अलावा चाहे कोई भी टैक्स हो हम समय पर भरते हैं। हमारे पास प्रदूषण बोर्ड से संबधित सभी कागजात पूरे हैं कोई भी अधिकारी जब मर्जी देख सकता है। वहीं दूसरी ओर प्रदूषण बोर्ड के सदस्य सचिव आदित्य नेगी ने कहा कि अगर किसी भी उद्योग को कोई समस्या है तो जब मर्जी मुझे शिकायत भेजे या कभी भी आकर मिल सकता है।































