भक्तों के लिए चिंतित रहते है परमात्मा
करनाल, आशुतोष गौतम (22 अक्तूबर) स्थानीय उत्तम औषधालय के प्रांगण में चल रही कार्तिक मास की कथा में पंडित चेतन देव ने उपस्थित श्रृद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि परमात्मा देवताओं तथा अपने भक्तों के कार्य की सिद्धि के लिए श्राप ग्रहण करने पे भी हिचकिचाते नहीं हैं क्योंकि परमात्मा ने देवताओं की सिद्धि के लिए पतिव्रता वृंदा का शील हर लिया और इस पर वृंदा ने क्रोधित हो कर भगवान विष्णु को श्राप दे दिया जिसे परमात्मा ने उस श्राप को ग्रहण कर लिया, परन्तु उस श्राप के साथ उन्होंने वृंदा को वर भी दे दिया कि तुम वृक्ष रूप में मुझे मिलोगी। उधर विष्णु जी वृंदा की चिता में लोटने लगे तब सभी देवताओं ने शिवजी की स्तूति की और कहा कि महाराज जलंधर को मारकर देवताओं पर बड़ा उपकार किया है परन्तु एक महान अनर्थ हो रहा कृपा करके उसका भी उपाया बताए। पंडित जी ने बताया कि भगवान विष्णु ने वृंदा के पतिव्रत धर्म से मोहित हो कर लगातार उसकी चिता भस्म पर लोट रहे हैं और किसी प्रकार का विश्राम नहीं कर रहे। दूसरी ओर वृंदा का पतिव्रत धर्म समाप्त होते ही जलंधर का बल शीण होने लगा। भगवान विष्णु ने सुर्दशन सहित अपना तेज भगवान शिवजी को दे दिया फिर शिवजी अपना षियों के तप का पतिव्रता स्त्रीयों का तथा ब्रह्मा जी का तेज उसमें जोड़कर जलंधर दैत्य पर छोड़ दिया जिससे उसका सिर कट भूमि पर गिर पड़ा। सिर शरीर से अलग होते ही जलंधर का तेज निकल शिवजी में तथा वृंदा का तेज भी प्रार्वती जी में समा गया। इससे पूर्व संगीत मंडली द्वारा अपने मधुर भजनों से उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया तथा इस से पुर्व वैद्य देवेन्द्र बत्तरा व उनकी धर्मपत्नी दर्शना बत्तरा व सैकड़ो श्रद्धालुओं ने हवन-यज्ञ किया और आहुति डाली, हवन यज्ञ के बाद पंड़ित जी ने हंसवाणी द्वारा सब को भाव-विभोर किया। इस अवसर पर राजेंद्र मोहन शर्मा, भारत भूषण, बीना मलिक, सोनू मलिक, सुभाष गुरेजा व रामलाल ग्रोवर आदि मौजूद थे।
































