150 से 200 रूपये कम मूल्य पर खरीदी जा रही धान की फसल : रमीत फौजी
बददी, 6 सितम्बर (कविता गौत्तम) एक तरफ जहां केन्द्र सरकार किसानों की हिमायती बन कर कहीं भी अपनी फसल बेचने की बात करती है वहीं दूसरी ओर हिमाचल के किसानों को हरियाणा में अपनी फसल बेचने पर समर्थन मूल्य का डेढ सौ से दो सौ रूपये कम दिया जा रहा है। दरअसल हिमाचल राज्य में कोई भी धान की मंडी नहीं है और हिमाचल के किसानों को अपनी फसल बेचने के लिये हरियाणा, पंजाब की मंडियों में जाना पडता है। लेकिन वहां के आढतियों का कहना है कि हम केवल हरियाणा के किसानों की ही जीरी खरीदेंगे अन्य राज्यों की फसल में काट कटेगी।
बीबीएन के किसान राजिन्द्र, जितेन्द्र, रमीत फौजी, राजकुमार, संजीव कुमार आदि का कहना है कि हमारी जमीनें हरियाणा की सीमा के साथ लगती हैं और हिमाचल में कोई भी धान की मंडी न होने की वजह से उन्हें अपनी फसल हरियाणा की मंडी में बेचनी पड रही है। लेकिन दूभागर््य की बात है कि हरियाणा की मंडियों में हिमाचली किसानों को डेढ सौ से दो सौ रूपये कम किमत पर धान की फसल को खरीदा जा रहा है जोकि सरासर अन्याय है। यही नहीं मंडी में जाकर हर किसान का आधार कार्ड और फर्द चैक करके ही फसलों को खरीदा जा रहा है। उपरोक्त लोगों का कहना है कि यदि यही हालात रहे तो किसान खेतीबाडी करना बंड कर देंगे। जब हम एक राज्य से दूसरे राज्य के किसानों को ही अलग थलग कर देंगे तो कौन किसानी करेगा। उन्होने आरोप लगाते हुए कहा कि जब सभी सब्जियां व फल हिमाचल से अन्य राज्यों बिना किसी भी भेदभाव के बेची जा रही हैं तो हरियाणा में केवल धान की फसल पर हिमाचल के किसानों के साथ क्यों अन्याय किया जा रहा है। इस ओर सरकारा को जरूर ध्यान देना चाहिए।
इस विषय पर भारतीय किसान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल चन्द ने कहा कि कोई भी सरकार किसानों की ओर ध्यान नहीं दे रही है। केन्द्र की सरकार संसद में बिल पास करवाकर स्वयं अपनी पीठ थपथपा रही है दूसरी ओर विपक्षी नेता सडकों पर आन्दोलन कर रहे हैं। जबकि किसानों का राज्यों की सीमाओं के बंधन में बांधकर आढतियों व बिचौलियों के पास दर दर की ठोकरें देकर शोषण किया जा रहा है।































