“जनता ने कौन सा गुनाह किया है कि सजा भुगत रही है” —सरकार से पूछा, किसके इशारे पर तीन साल तक लटकाया पुल का काम ?
डॉ रणधीर जसवाल, ऊना। रामपुर का टूट चुका पुल अब सिर्फ स्थानीय समस्या नहीं रहा, बल्कि बुधवार को इसकी गूंज हिमाचल प्रदेश विधानसभा तक पहुंच गई। ऊना सदर के भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने शून्यकाल में करीब तीन वर्षों से बदहाल पड़े संतोषगढ़ रोड स्थित रामपुर पुल का मुद्दा उठाते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला।सत्ती ने सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए सवाल दागा कि आखिर तीन साल से जनता को किस गुनाह की सजा दी जा रही है? उन्होंने पूछा कि जब पुल हजारों लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही, व्यापार, बस सेवाओं और औद्योगिक परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, तो इसके स्थायी समाधान में इतनी लंबी देरी क्यों की गई? उन्होंने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि आखिर किसके इशारे पर जनता को लगातार परेशान किया जा रहा है और देरी के लिए जिम्मेदार कौन है?लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने जवाब देते हुए कहा कि पुल के पुनर्निर्माण के लिए प्रदेश सरकार ने बजट जारी कर दिया है और विभाग को काम जल्द शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।15 पंचायतों की जनता तीन साल से भुगत रही परेशानीसत्ती ने कहा कि रामपुर पुल का महत्व केवल ऊना सदर तक सीमित नहीं है। इसके क्षतिग्रस्त होने से करीब 15 ग्राम पंचायतों, संतोषगढ़ नगर परिषद, हरोली विधानसभा क्षेत्र और पंजाब की ओर आने-जाने वाले हजारों लोगों को लगातार परेशानी उठानी पड़ रही है।पुल के टूटने के बाद लोगों को कभी खड्ड के रास्ते से वाहन निकालने पड़ते हैं तो कभी कई किलोमीटर लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ता है। रोजाना आने-जाने वाले लोगों के लिए यह समस्या अब परेशानी से बढ़कर आर्थिक बोझ बन चुकी है। अतिरिक्त दूरी का मतलब है अतिरिक्त ईंधन, अतिरिक्त समय और अतिरिक्त खर्च।इंडियन ऑयल टर्मिनल की ढुलाई भी प्रभावितसत्ती ने विधानसभा में इस मार्ग के औद्योगिक महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इसी मार्ग पर इंडियन ऑयल का बड़ा टर्मिनल स्थित है। पुल की बदहाली के कारण भारी वाहनों की आवाजाही और ढुलाई व्यवस्था भी पिछले करीब तीन वर्षों से प्रभावित हो रही है।उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों तथा पंजाब की ओर जाने वाली बस सेवाओं पर भी इसका असर पड़ा है। ऐसे में यह पुल केवल सड़क का एक हिस्सा नहीं, बल्कि क्षेत्र की परिवहन और आर्थिक गतिविधियों की महत्वपूर्ण कड़ी है।“सरकार की कुंभकर्णी नींद कब टूटेगी?”सरकार पर हमला बोलते हुए सत्ती ने कहा कि तीन साल से जनता समस्या झेल रही है, लेकिन सरकार की कुंभकर्णी नींद टूटने का नाम नहीं ले रही। उन्होंने कहा कि जनता को रोजाना परेशानियों से दो-चार होना पड़ रहा है और अब सिर्फ बजट जारी करने की घोषणा से काम नहीं चलेगा।उन्होंने सरकार से सवाल किया कि अगर बजट उपलब्ध है तो निर्माण कार्य शुरू करने में और कितना समय लगेगा ? उन्होंने मांग की कि जिम्मेदारी तय की जाए और देरी करने वाले अधिकारियों से जवाब मांगा जाए।टूटे पुल ने छीनी दुकानदारों की रौनक रामपुर के दुकानदार भी पुल टूटने का खामियाजा भुगत रहे हैं। मुख्य मार्ग पर वाहनों की आवाजाही कम होने से स्थानीय व्यापार प्रभावित हुआ है। दुकानदारों का कहना है कि जब लोगों की आवाजाही ही कम होगी तो बाजार में ग्राहक कैसे पहुंचेंगे। सत्ती ने कहा कि पुल की समस्या का असर केवल यातायात पर नहीं, बल्कि स्थानीय कारोबार और रोजगार पर भी पड़ रहा है। अब आश्वासन नहीं, चाहिए जमीन पर काम सत्ती ने सरकार से मांग की कि बजट जारी होने के बाद अब फाइलों और कागजी प्रक्रियाओं में समय बर्बाद न किया जाए। पुल का निर्माण युद्धस्तर पर शुरू करवाकर जनता को राहत दी जाए। उन्होंने साफ कहा कि तीन साल से अस्थायी व्यवस्था के भरोसे चल रहे इस महत्वपूर्ण मार्ग के लोगों को अब आश्वासन नहीं, स्थायी समाधान चाहिए।































