लंका पर चढ़ाई के लिए हजारों लोगोंं ने खींचा रघुनाथ का रथ,मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने किया कलाकेंद्र में विधिवत समापन
लंका बेकर में रथ पहुंचने पर हुआ लंका का दहन ,भगवान रघुनाथ की प्रतिमा स्थायी शिविर में स्थापित
नीना गौतम कुल्लू, 14 अक्तूबर। लंका दहन के साथ विश्व का सबसे बड़ा देवमहाकुंभ सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कु ल्लू दशहरा उत्सव संपन्न हो गया है।देवताओं के इस महाकुंभ में हजारों लोगों सहित सैंकड़ों देवी-देवतााओं नेभी डुबकी लगाई। उधर, मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने अंतरराष्ट्रीय लाल चंदप्रार्थी कलाकेंद्र में दशहरा उत्सव का विधिवत समापन किया। विश्व के सबसेबड़े देव महाकुंभ एवं अनूठी परंपराओं का संगम कुल्लू दशहरा पर्व में रघुनाथ की रथ यात्रा के बाद विधिवत रूप से लंका दहन के नजारे के हजारों लोग गवाही बने। लिहाजा,सातदिनोंतक चलने वाले इस महाकुंभ में सैंकड़ों देवी-देवताओं के साथ रघुनाथ जी ने लंका पर चढ़ाई कर रावण परिवार के साथ बुराई का भी अंत किया है। लंका चढ़ाई के लिए हुई रथ यात्रा में यहां पहुंचे सभी देवी-देवताओं ने भाग लिया। लंका दहन के साथ ही अंतरराष्ट्रीय
दशहरा उत्सव का समापन हुआ। गोबर के बने रावण मेघनाथ व कुंभकर्ण को तीर से भेदने के बाद लंका में आग लगाई गई। इससे पहले दिन के समय कुल्लू के राजा सुखपाल में बैठकरढालपुर के कलाकेंद्र मैदान में पहुंचे और महाराजा के जमलू, पुंडीर, रैलू देवता नारायण व वीर देवता की दराग तथा रघुनाथ जी की छड़ व नरसिंह भगवान की घोड़ी भी राजा के साथ कला केंद्र मैदान पहुंची,जहां खड़की जाच का आयोजन हुआ। इसके बाद ही रथ यात्रा शुरू हुई। रथयात्रा सफलतापूर्वक संपन्न होते ही देवी-देवताओं ने अपने-अपने
स्थलों की ओर जाना आरंभ कर दिया है। राजपरिवार के सदस्य महेश्वर सिंह, दानवेंद्र सिंह, हितेश्वर सिंह व आदित्यविक्रम ने अपनी पारंपारिक
वेशभूषा में सुसज्जित होकर रघुनाथ जी की रथयात्रा की अगवाई की। इस रथयात्रा में देवी हडिंबा के आते ही यात्रा का शुभारंभ हुआ। भगवान
रघुनाथ जी की रथ यात्रा आरंभ होते ही जयाकारों के उदघोषोंं व वाद्ययंत्रों से सारा वातावरण कुछ क्षणों के लिए गुजायमान हो गया।
रथयात्रा पूरी होने पर रथ को ढालपुर मैदान से रथ मैदान तक लाया गया जहां से रघुनाथ जी की प्रतिमा को पालकी में प्रतिष्ठित करके उनके कारकूनों, हारियानों व सेवक ढोल-नगाड़ों व जयकारों के उदघोषों के साथ रघुनाथ में उनके स्थाई मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद स्थापित किया गया। इसी के साथ सात दिवसीय कुल्लू दशहरा संपन्न हो गया। रघुनाथ जी की रथ यात्रा को सफलतापूर्वक संपन्न करवाकर जिला भर से आए देवी -देवताओं ने अपने स्थलों की ओर जाना आरंभ कर दिया। वहीं, मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अंतरराष्ट्रीय लालचंद प्रार्थी कला केंद्र में दशहरा पर्व का समापन किया।































