एक मैकेनिज्म के तहत कमेटी गठित कर स्कूलो में जाकर चैकिंग करने के दिए निर्देश
करनाल, आशुतोष गौतम ( 5 दिसंबर ) राष्ट्र की अमूल्य सम्पति और भावी कर्णधार स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला समिति के अध्यक्ष एवं उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने गुरूवार को लघु सचिवालय के सभागार में एक महत्वपूर्ण मीटिंग ली। मीटिंग में जिला शिक्षा अधिकारी रविंद्र चौधरी, मौलिक शिक्षा अधिकारी राज पाल, सीबीएसई स्कूलों के जिला प्रधान राजन लांबा के अतिरिक्त डिप्टी सीएमओ राजेश गोरिया, डीटीपी कार्यालय के प्रतिनिधि, जिला अग्निशमन अधिकारी राम पाल तथा कई निजी स्कूलों के प्राचार्य व प्रतिनिधि शामिल हूए। उपायुक्त ने वर्ष 2017 में बनी स्कूल सुरक्षा पॉलिसी में दिये गये दिशानिर्देशों का हवाला देकर मिटिंग की शुरूआत की और बताया कि सभी सरकारी व निजी स्कूलों में परिसर को कवर करते हुए, गलियारा, सीढिय़ां, लाईब्रेरी, कम्पयुटर लैब, प्रवेश और निकास बिंदु पर अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कैमरे होने चाहिए। छात्रों के लिए सुरक्षित परिवहन सुविधा और अच्छे व बुरे के प्रति जागरूकता पैदा की जाए। उन्होंने कहा कि कई स्कूलों में सुरक्षा को लेकर समितियां गठित है, लेकिन ऐसी समितियां सभी स्कूलो में होनी चाहिए। महीने में कम से कम एक बार वे इन बिंदूओं की सुरक्षा को लेकर बैठक करें। इसके अलावा स्कूल स्टाफ और अभिभावक की काउंस्लिंग भी होनी चाहिए जिसमें उनके सुझाव भी लिए जाए। क्योंकि बच्चों की जिम्मेदारी स्कूल के साथ-साथ अभिभावकों की भी है। घर पर बच्चेे को एक अच्छा माहौल अविभावक ही प्रदान कर सकते है, अच्छा होगा यदि प्रतिदिन बच्चों के बैग भी चैक कर लिए जाएं। पॉलिसी के दिशा-निर्देशों पर चर्चा करने के बाद उपायुक्त ने उपस्थित सभी से सुझाव लेकर निर्देश दिए कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक मैकेनिज्म यानि तंत्र या कार्यविधि बनाई जाए और इसे लागू करने के लिए एक कमेटी हो, जिसमें जिला शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक स्तर पर खण्ड़ शिक्षा अधिकारी, आर.टी.ए. कार्यालय का एक प्रतिनिधि तथा फायर सेफ्टी ऑफिसर को शामिल किया जाए। गठित कमेटी महीने में कम से कम 4-5 स्कूल चैक करें, इसका तात्पर्य यह नहीं कि स्कूलों का औचक निरीक्षण किया जा रहा है। कमेटी के सदस्य स्कूल में जाकर वहां लगे अग्निशमन यंत्रो को चैक करें। आपदा के समय उनका प्रयोग कैसे किया जाना है, अध्यापकों विशेषकर गैर शिक्षक स्टाफ को उसका प्रशिक्षण होना चाहिए। इसके साथ-साथ स्कूल वाहन में भी फायर एस्टिंगविशर ठीक से हैं या नहीं, उन्हें भी चैक किया जाए। स्कूल का भवन, निर्माण की दृष्टि से सुरक्षित हो, उसके ऊपर बिजली की तारें ना हों, बच्चों के शौचालय इत्यादि सुरक्षित बने हों। फस्ट एड के लिए जरूरी चीजें भी होनी चाहिए। किसी भी दुर्घटना से बचाव की सूचना के लिए एम्बूलेंस, महिला सुरक्षा व पुलिस के हैल्प लाईन नम्बर भी होने चाहिएं। उन्होंने इस तरह की चैकिंग को स्कूल ऑडिट (अंकेक्षण) कहा। उन्होंने बताया कि स्कूल में सभी सुरक्षा उपायों को लेकर एक प्रफोर्मा भी है, जिसे देख लिया जाए। उपायुक्त का कहना था कि चैंकिंग के बाद जो स्कूल पॉलिसी गाईड लाईन को सही-सही रूप में पालन करेंगे, उन्हें एक सर्टिफिकेट दिया जाएगा और स्कूल का नाम जिला वैबसाईट पर डाला जाएगा। इस तरह की कार्रवाई से साल में कम से कम 50 स्कूल कवर हो जाएंगे, जो एक बड़ी बात होगी।

































