आठवीं दसवीं और बीएससी के बाद युवा कर सकते हैं विभिन्न कोर्स
बीबीएन, 15 नवंबर ( कविता गौत्तम ) सिपेट भारत का एक ऐसा अग्रणीय संस्थान है जहां से किसी भी प्रकार का प्रशिक्षण लेने के बाद कोई भी युवा यह नहीं कह सकता है कि वह बेरोजगार है और उसे रोजगार नहीं मिला क्योंकि सिपेट से जो भी व्यक्ति किसी भी प्रकार का प्रशिक्षण प्राप्त करता है तो उसके लिए स्वरोजगार के साथ साथ रोजगार के भी दरवाजे खुल जाते हैं। केंद्र सरकार द्वारा बददी में संचालित इस संस्थान में पिछले चार वर्षों से युवाओं की प्रतिभा को तराश कर प्रशिक्षत कर रहें सिपेट संस्थान से अभी तक कोई भी ऐसा युवा नहीं है जो प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद रोजगार के लिए दर दर भटक रहा हो बशर्ते वह स्वयं काम करने का इच्छुक न हो तो। सिपेट यानि सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी जहां पर प्लास्टिक से जुड़े हर उद्योग के बारे में सिखाया जाता है। आज देश में अधिक से अधिक वस्तुओं को बनाने में प्लास्टिक का प्रयोग किया जा रहा है। यदि गहराई से नजर दौड़ाई जाए तो आज से कई वर्ष पूर्व कांच के सीरिंज इस्तेमाल की जाती थी। गलूकोस चढ़ाने के लिए कांच की बोतल प्रयोग की जाती थी। आटोमोबाइल पार्ट के लिए मेटल का प्रयोग किया जाता था लेकिन आज की परिस्थितियां बदली हुई हैं। आज सीरींज बनाने में प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जा रहा है। गलूकोस प्लास्टिक की बोतल चढ़ाई जा रही है। पहले जहां लोहे की कुर्सियां प्रयोग में लाई जाती थी वहीं आज नए नए डिजाइनों में प्लास्टिक की कुर्सियां मिल रही हैं। पहले लकडी के दरवाजे बनाए जाते थे लेकिन वर्तमान में प्लास्टिक के दरवाजे बाजार में आर्कषक और बेहतर डिजाइनों में मिल जाते हैं। ऐसे में आने वाले समय में प्लास्टिक की क्या महत्ता है समझा जा सकता है और आने वाले भविष्य का अंदाजा भी लगााया जा सकता है। ऐसे में प्लास्टिक के क्षेत्र में न केवल रोजगार बल्कि स्वरोजगार भी अपनाया जा सकता है।
हिमाचल के बददी में कब अस्तित्व में आया सिपेट—
देश के अन्य राज्यों में कार्यशील होने के बाद हिमाचल के बददी क्षेत्र में प्लास्टिक के अधिक उद्योग होने के कारण यहां पर भी एक ऐसा संस्थान स्थापित करने की आवश्यकता थी जो उद्योगों को एक कुशल कारीगर दे सके। इसी आवश्यकता को देखते हुए 2015 में बददी में सिपेट की स्थापना की गई। तत्कालीन मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश एवं केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री द्वारा किराए के भवन में इसका शुभारंभ किया गया। उस समय यहां पर केवल प्लास्टिक प्रोसेसिंग टेक्निक के कोर्स से शुरूआत की गई थी लेकिन इसके बाद यहां पर टूलिंग आप्रेटर का भी प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया गया। जैसे जैसे समय बीतता गया वैसे वैसे यहां पर अन्य कोर्स भी शुरू कर दिए गए।
प्लास्टिक का प्रयोग किस देश में कितना- अब प्लास्टिक के प्रयोग की बात करें तो कोई ऐसा देश नहीं है जहां पर प्लास्टिक का प्रयोग नहीं किया जा रहा है। ऐसे में नजर दौड़ाई जाए तो वर्ष 2018-19 अमेरिका में प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष 109 किलोग्राम, यूरोप में 65 किलोग्राम, चीन में 38 किलोग्राम, ब्राजील में 32 किलोग्राम और भारत में सिर्फ 11 किलोग्राम प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष प्लास्टिक की खपत होती है। अत: भविष्य में विदेशों के अनुसार भारत में प्लास्टिक की खपत और बढने की संभावना है।
आठवीं कक्षा के बाद कौन सा कोर्स करें- आठवीं कक्षा पास करने के बाद कोई भी युवा टूलिंग आप्रेटर एवं प्लास्टिक प्रोसेसिंग मशीन ऑपरेटर का प्रशिक्षण प्राप्त कर सकता है। यह 6 महीने का कोर्स होता है तथा इसमें प्रशिक्षु को रहने, खाने तथा प्रशिक्षण के दौरान प्रयोग की जाने वाली सामग्री निशुल्क उपलब्ध करवाई जाती है। दसवीं कक्षा पास करने के बाद या आइटीआइ करने के बाद युवा सीएंडसी मिलिंग मशीन आप्रेटर अथवा सीएंडसी लेथ मशीन आप्रेटर का प्रशिक्षण भी ले सकता है। इसमें युवाओं को रोजगार प्राप्त हो जाता है।
दसवीं कक्षा के बाद कोर्स- दसवीं कक्षा करने के बाद यदि युवा चाहे तो वह तीन साल का डिप्लोमा इन प्लास्टिक टेक्नोलॉजी कर सकता है या फिर डिप्लोमा इन प्लास्टिक मोल्ड टेक्नोलॉजी कर सकता है।
कैसे करें आवेदन- आठवीं कक्षा के बाद 6 माह का कोर्स करने के लिए इच्छुक व्यक्ति को ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इसमें इंस्टिट्यूट की ओर से एक विज्ञापन जारी किया जाता है जिसमें मोबाइल नंबर व लिंक दिया जाता है जिसमें अभ्यर्थी को आवेदन करना होता है। इसके बाद उसका इंटरव्यू होता है तथा उसके आधार पर ही अभ्यर्थी का चयन होता है। दससीं कक्षा के बाद यदि कोई 3 साल का डिप्लोमा करना चाहता है तो उसके लिए ऑल इंडिया लेवल का टेस्ट होता है जिसमें मेरिट के आधार पर अभ्यर्थी का चयन किया जाता है। इसमें प्रति सेमेस्टर लगभग 18 हजार रूपए फीस लगती है।
पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्स- बी.एस.सी करने के बाद युवा 2 साल का पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन प्लास्टिक प्रोसेसिंग एंड टेस्टिंग का कोर्स कर सकता है। इसमे आवेदन करने के लिए जनवरी / फरवरी में विज्ञापन जारी होता है जिसके बाद इसमें भी ऑल इंडिया लेवल का टेस्ट होता है। इसमें प्रति सैमेस्टर लगभग 20 हजार रूपए फीस लगती है। जिस राज्य में यह कोर्स चल रहे हैं उन कोर्स में उस राज्य के युवाओं के लिए 85 प्रतिशत सीटें आरक्षित होती हैं जबकि 15 प्रतिशत अन्य राज्यों के लिए आरक्षित होती हैं। यदि यह कहा जाए कि प्रत्येक राज्य के अभ्यर्थी को उस राज्य के इंस्टीट्यूट में 85 प्रतिशत के आधार पर वरीयता दी जाती है तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।






























