रावण जलाने वाले नेता बनता है विधायक -चेयरमैन या मिलता है उच्च पद
बददी, 8 अक्तूबर।
औद्योगिक नगर बददी के वार्ड दो में होने वाले दशहरे का बेशक कोई एतिहासिक व पौराणिक महत्व न हो लेकिन इस औद्योगिक नगर में होने वाले इस धार्मिक समारोह का सियासतदानों के लिए बहुत महत्व है। वक्त के साथ ऐसी मान्यता हो चुकी है कि जो भी सियासी नेता या कार्यकर्ता सच्चे मन से यहां पर अतिथि बनकर आता है तो वह देर सवेर सरकार या संगठन में उच्च पद पा जाता है। बददी के दशहरे में रावण जलाने वाले नेता एक समय में अपने जीवन के शीर्षत्व काल पर भी पहुंचे है लेकिन बडा पद पाने के बाद जो यहां वापिस नहीं आता उसको फर्श पर आते भी देर नहीं लगी। यहां पर भाजपा नेत्री विनोद चंदेल रावण जलाने आती थी तो उनको 2007 में विधायक पद का ताज मिला। तत्कालीन कांग्रेस नेता परमजीत सिंह यहां रावण दहन करने आए तो बाद में भाजपा के टिकट पर 2017 में एमएलए भी बन गए। भाजपा नेता दर्शन सिंह सैणी यहां पर रावण दहन करने आए तो उनको पार्टी से टिकट तो नहीं मिला लेकिन सरकार बनने पर उनको जल बोर्ड उपाध्यक्ष का ताज बहुत बडा ताज मिला। ट्रेड यूनियन नेता मेलाराम चंदेल बददी दशहरा में अतिथि बनकर आए तो पहले तो वह हिंद मजदूर सभा के प्रदेशाध्यक्ष और बाद में पदोन्नत होकर भारतीय मजदूर संघ के कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष बन गए। ट्रेड यूनियन नेता राजकुमार चौधरी अब जनशक्ति पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष के पद पर विराजमान है। इस दशहरे में जो तन मन धन और सच्चे मन से जुडता है उसका उद्वार प्रभु श्रीराम जूठे बेर खिलाने वाली भिलनी की तरह कर ही देते हैं। संजीव कौशल जेसीसी बैंक के साधारण निदेशक थे। उन्होने इस दशहरे को कराने की सोची तो बैंक की चेयरमैनी मिल गई। वरिष्ठ पत्रकार आर.एस राणा जो कि एक छोटे से तहसीलस्तरीय प्रेस क्लब बददी के अध्यक्ष थे यहां इस धार्मिक समारोह से जुडे तो प्रभु श्रीराम की कृपा से दो ही साल में नेशनल यूनियन आफ जनर्लिस्टस इंडिया (एनयूजे इंडिया)के प्रांत अध्यक्ष पद पर पहुंच गए।
जो नहीं आए वो नहीं बने-दून के वरिष्ठ मदन लाल को यहां पर रावण जलाने का मौका ही नहीं मिला तो वो विधायक या स्टेट चेयरमैन की गददी तक नहीं पहुंच पाए। मैडम चंदेल दशहरे से नहीं जुडी रह सकी तो चुनाव हार गए। किन्ही राजनीतिक कारणों से सियासी नेता राम इसका हिस्सा नहीं बन पाए तो उनको भी अपने ताज से हाथ धोना पडा। बददी शहर के दशहरे की अब प्रदेश में अब इतनी मान्यता व चर्चा है कि यहां आने वाला नेता एक न एक दिन जरुरत चमकता है व शीर्ष पर पहुंचता है और बनने के बाद जो इसकी उपेक्षा करता है उसको नीचे आने में भी ज्यादा समय नहीं लगता।
अब बलविंद्र ठाकुर पर है निगाहें-
इस बार के दशहरे में आयोजकों ने जिला भाजपा सचिव बलविंद्र सिंह ठाकुर को मुख्य अतिथि के तौर पर रावण दहन करने के लिए बुलाया है साथ में विधायक परमजीत सिंह व दर्शन सैणी वाईस चेयरमैन को भी न्यौता भेजा है। अब देखना यह है कि पहली बार दशहरा मेले में रावण दहन करने आ रहे बलविंद्र ठाकुर भविष्य में किस पद पर पहुंचते हैं क्योंकि चर्चा है कि यहां पर रावण दहन करने वाला जीवन में एक बार विधायक या चेयरमैन जरुर बनता है और विधायक पद का रास्ता इसी मैदान से होकर गुजरता है। दूसरे मुख्य अतिथि राजकुमार चौधरी भी जिप सदस्य की दौड में है और अगले साल पंचायत चुनाव भी है। मेलाराम चंदेल पहले ही कार्यकारी अध्यक्ष बीएमएस के शीर्ष पद पर जा चुके हैं। जिन लोगों ने शीर्ष पद पाने के बाद यहां पर दोबारा कदम इसलिए नहीं रखा कि वो इस बार मुख्य अतिथि नहीं है इसलिए वह नहीं आएंगे तो उनका बाद में जनता ने क्या हाल किया है वो सबको पता ही है। अब 8 अक्तूबर को होने वाले दशहरे मेले में दून के किस नेता का भविष्य बनता व संवरता है यह तीन साल बाद ही 2022 के विस चुनावों में ही पता चलेगा।































