हरियाणा में बहरेपन की किसी न किसी समस्या से पीड़ित लोगों की संख्या 11 लाख से ज्यादा है
विशेषज्ञों का मानना है कि यहां सुनने की क्षमता के स्वास्थ्य के लिए विशेष प्रयास करना आवश्यक है
करनाल, आशुतोष गौतम (13 नवंबर) नामचीन अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खिलाडी और कॉक्लियर के ग्लोबल हियरिंग अम्बेसडर ब्रेट ली ने बुधवार को शहर में आकर युनिवर्सल न्यू.बॉर्न हियरिंग स्क्रीनिंग ;यूएनएचएसद्ध और सुनने की क्षमता में समस्या से पीड़ित बच्चों की जांच और इलाज के बारे में लोगों को जागरूक किया। उनके साथ शहर के जानेमाने सर्जन्स और विशेषज्ञ जैसे किए करनाल मेडिकल सेंटर के ईएनटी कंसल्टेंट सर्जन डॉ. संजय खन्नाए आईएमए प्रेसिडेंट डॉ. इक़बाल सिंह और आईएमए करनाल के सेक्रेटरी डॉ.तेजिदर खन्ना ने भी हरयाणा और पडोसी क्षेत्र में लोगों की सुनने की क्षमता का स्वास्थ्य बरक़रार रखे जाने के विषय पर अपने विचार प्रकट किए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ो के अनुसार दुनियाभर में बहरेपन की समस्या से पीड़ित 466 मिलियन लोगों में से 34 मिलियन बच्चें हैं। सभी नवजात शिशुओं की सुनने की क्षमता की जांच जन्म के समय ही की जाए यह सुनिश्चित करना यूएनएसएच का उद्देश्य है। किसी भी समस्या को आने से रोकनाए उसके बारे में सावधानी बरतना उसपर इलाज करने से बेहतर है और इसलिए नवजात शिशु की सुनने की क्षमता को स्वस्थ रखने के लिए यूनिवर्सल न्यूबॉर्न हियरिंग स्क्रीनिंग ;यूएनएचएसद्ध बहुत ही जरुरी है। इस पहल के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए ब्रेट ली ने बतायाए बहरेपन की समस्या बढ़ती जा रही है और आज इस मंच से मैं आप सभी का ध्यान इस समस्या की ओर खींचना और यूनिवर्सल न्यूबॉर्न हियरिंग स्क्रीनिंग ;यूएनएचएसद्ध प्रोग्राम के बारे में जागरूकता बढ़ाना चाहता हूं। मेरा मानना है कि जिंदगी की आवाजें सुनने का अधिकार हर व्यक्ति को मिलना चाहिए। इस दुनिया में किसी भी व्यक्ति का बिना आवाजें सुने रहना बहुत दुखदायक है। इस समस्या को सुलझाने के लिए यूएनएचएस काफी मददगार साबित हो सकता है। बाल चिकित्सा विशेषज्ञ और आईएमए जैसे संस्थान बहरेपन की समस्या पर इलाजों के प्रति जागरूकता बढ़ा सकते हैं। करनाल मेडिकल सेंटर के ईएनटी कंसल्टेंट सर्जन डॉण् संजय खन्ना ने बतायाए ष्हरयाणा में 115000 से ज्यादा लोग बहरेपन की किसी न किसी समस्या से पीड़ित हैं और यह संख्या बढ़ती जा रही है। इसे रोकने के लिए हरयाणा में यूनिवर्सल न्यूबॉर्न हियरिंग स्क्रीनिग, यूएनएचएसद्ध प्रोग्राम की तुरंत जरुरत है। समस्या की जांच जितनी जल्दी होगी उतने ही इलाज प्रभावकारी और सफल हो सकते हैं। ऑप्टिमम स्पीच थेरपी और सर्जरी के बाद देखभाल से बच्चे का भाषिक विकास भी बेहतर हो सकता है। इससे बच्चे की सीखने की क्षमता में सुधार होता है। मैंने कई बच्चों और उनके परिवारों पर इलाजों के लक्षणीय प्रभावों को होते हुए देखा है। डॉ खन्ना ने आगे बतायाए ष्जिन बच्चों में सुनने की समस्या की पहचान की गयी है उनके लिए हमारे चिकित्सा केंद्र में जल्द से जल्द निदानए इलाज और देखभाल की सुविधाएं हैं। एक जिम्मेदार संगठन होने के नाते हम नियमित रूप से जांच शिविर और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। प्यान्शु जिंदल मुक्तसर का निवासी और एमबीबीएस का पहले वर्ष का छात्रए कॉक्लियर इम्प्लांट रेसिपियंट है। अपने अनुभवों को सभी के साथ सांझा करते हुए उसने बताया कि कैसे कॉक्लियर इम्प्लांट ने उसकी जिंदगी बदल दी। प्यान्शु के धैर्य और दृढ़ संकल्प को सुनने की क्षमता का उपहार मिला और फिर उसने वह सब कर दिखाया जो किसी भी बहरे व्यक्ति के लिए असंभव माना जाता है। आज हमारे देश में केरल यह एकमात्र राज्य है जहां सभी सरकारी अस्पतालों में यूएनएसएच को 98: सफलता मिली है। केरल सोशल सिक्युरिटी मिशन ने ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित किया है जिसमें जिन नवजात शिशुओं की जांच की जाती है उनकी जानकारी जमा की जाती है। डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर्स ;डीईआईसीद्ध जैसे संस्थानों और मेडिकल कॉलेजेस द्वारा इस जानकारी का नियमित फॉलो.अप्स में उपयोग किया जाता है और इससे उन्हें पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों को आधुनिक सेवाएं मुहैया करने में मदद मिलती है। आज इस क्षेत्र में ष्श्रुतिथारंगमष् इस कॉक्लियर इम्प्लांट प्रोग्राम की सफलता की यही बुनियाद है। इस प्रोग्राम में न केवल कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी पर ध्यान केंद्रित किया जाता है बल्कि बच्चों के लिए जांच और देखभाल के लिए बुनियादी सुविधाओं के विकास पर भी ध्यान दिया जाता है। केरल के अलावा गुजरातए महाराष्ट्रए तमिलनाडु और राजस्थान में भी कॉक्लियर इम्प्लांट ;सीआईद्ध प्रोग्राम चलाया जाता है।































