लेबर रूम में पहुंची महिला, पहले नवजात की मौत की खबर और फिर मां ने भी तोड़ा दम; परिजनों के गंभीर आरोपों के बाद पुलिस ने दर्ज की एफआईआर
तीन दिन तक अस्पताल में भर्ती रही रीना कुमारी, उपचार व्यवस्था पर उठे सवाल; परिजन बोले—जवाबदेही तय हो, दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई
डॉ रणधीर जसवाल, ऊना। क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में प्रसव के दौरान एक गर्भवती महिला और उसके नवजात शिशु की मौत ने अस्पताल की उपचार व्यवस्था को सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया है। जिस अस्पताल में एक मां अपने बच्चे को जन्म देने और सुरक्षित घर लौटने की उम्मीद लेकर भर्ती हुई थी, वहीं से एक परिवार को दो मौतों का दर्द लेकर लौटना पड़ा। घटना के बाद अस्पताल परिसर में आक्रोश फूट पड़ा। गम और गुस्से से बेहाल परिजनों तथा ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और चिकित्सकों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है, जबकि अस्पताल प्रशासन ने गर्भवती महिला की मौत की पुष्टि की है।मृतका की पहचान अरनियाला निवासी रीना कुमारी, पत्नी राजीव कुमार, के रूप में हुई है। मां और नवजात की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। इस हृदयविदारक घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर तीन दिन से अस्पताल में भर्ती महिला की प्रसव के दौरान ऐसी हालत कैसे बिगड़ी कि उसकी और उसके नवजात की जान चली गई? क्या उपचार के दौरान सभी जरूरी चिकित्सकीय प्रक्रियाओं का समय पर पालन किया गया? महिला की हालत बिगड़ने पर उसे बचाने के लिए क्या कदम उठाए गए? इन सवालों के जवाब अब जांच के केंद्र में हैं।मृतका के पति राजीव कुमार के अनुसार, उनकी पत्नी पिछले तीन दिनों से प्रसव के लिए क्षेत्रीय अस्पताल में भर्ती थी। उनका दावा है कि शुक्रवार सुबह तक रीना कुमारी की हालत सामान्य थी और उसे प्रसव के लिए लेबर रूम में ले जाया गया था।राजीव कुमार के मुताबिक, लेबर रूम में ले जाने के कुछ समय बाद परिजनों को नवजात शिशु की मौत की सूचना दी गई। इसके बाद रीना को अल्ट्रासाउंड के लिए ले जाया गया। पति का आरोप है कि अल्ट्रासाउंड के लिए ले जाते समय उनकी पत्नी ने बातचीत करना बंद कर दिया था। बाद में उसे वापस अस्पताल लाया गया, जहां कुछ समय बाद परिजनों को उसकी मौत की सूचना दे दी गई।घटनाक्रम का यह सिलसिला परिजनों के मन में कई सवाल खड़े कर रहा है। उनका कहना है कि जब महिला तीन दिन से अस्पताल में भर्ती थी, तो प्रसव के दौरान पैदा हुई परिस्थितियों से निपटने के लिए क्या तैयारियां थीं? नवजात की मौत के बाद महिला की हालत बिगड़ने पर उसे बचाने के लिए क्या प्रयास किए गए? क्या समय रहते स्थिति की गंभीरता को पहचाना गया? इन सवालों का जवाब केवल आश्वासनों से नहीं, बल्कि उपचार से जुड़े रिकॉर्ड, चिकित्सकीय तथ्यों और निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।मृतका के जेठ ने चिकित्सकों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए कहा कि कथित लापरवाही के कारण जच्चा और बच्चा दोनों की जान चली गई। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते उचित उपचार और जरूरी चिकित्सकीय कदम उठाए जाते, तो शायद दोनों की जान बचाई जा सकती थी।एक ही परिवार में मां और नवजात की मौत ने परिजनों को झकझोर कर रख दिया है। परिवार अब इस पूरे घटनाक्रम की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है। उनका सवाल है कि आखिर उस उपचार प्रक्रिया में क्या हुआ, जिसके बाद पहले नवजात की मौत की सूचना मिली और फिर मां को भी नहीं बचाया जा सका?हालांकि, फिलहाल चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए मौत के वास्तविक कारणों और उपचार में किसी चूक की स्थिति स्पष्ट करने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है। जांच में यह सामने आना चाहिए कि महिला की हालत कब बिगड़ी, उस समय उसकी चिकित्सकीय स्थिति क्या थी और उसे बचाने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए।जच्चा-बच्चा की मौत की खबर फैलते ही मृतका के रिश्तेदार और ग्रामीण अस्पताल परिसर में एकत्रित हो गए। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया। आक्रोशित परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।परिजनों की मांग है कि घटना को महज एक दुखद मामला मानकर नजरअंदाज न किया जाए। प्रसव से संबंधित चिकित्सकीय रिकॉर्ड की जांच हो, उपचार के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया की पड़ताल की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि महिला तथा नवजात की जान जाने के पीछे वास्तविक कारण क्या रहे।परिजनों ने मांग उठाई है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।मामले को लेकर क्षेत्रीय अस्पताल ऊना के सीएमओ डॉ. संजय मनकोटिया ने गर्भवती महिला की मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। उन्होंने कहा कि घटनाक्रम को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई है, जिसे विभाग के उच्च अधिकारियों को सौंपा जाएगा।अब इस मामले में जांच की निष्पक्षता और उसके निष्कर्षों पर सबकी निगाहें टिकी हैं। पुलिस की एफआईआर, अस्पताल की रिपोर्ट और उपचार से जुड़े तथ्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आखिर उस दिन अस्पताल में क्या हुआ था और क्या किसी स्तर पर ऐसी चूक हुई, जिसे रोका जा सकता था































