कहा हर घटना के बाद जांच और निलंबन काफी नहीं, स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियां दूर करना सरकार की जिम्मेदारी
बीएचटी न्यूज,ऊना, 11 अक्टूबर। ऊना जिले के अर्नियाला गांव में प्रसव के दौरान गर्भवती महिला और उसके नवजात शिशु की मौत पर पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता वीरेंद्र कंवर ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।उन्होंने कहा कि हर दर्दनाक घटना के बाद जांच के आदेश देना और चिकित्सक को निलंबित करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। सरकार बताए कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उसने अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं? किसी परिवार की खुशियां उजड़ने के बाद कार्रवाई करने से बेहतर है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिसमें समय रहते मरीजों को उचित उपचार मिल सके।कंवर ने कहा कि प्रदेश के कई स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों की कमी, आवश्यक उपकरणों की अनुपलब्धता तथा आपातकालीन सेवाओं से जुड़ी चुनौतियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों का खामियाजा आम जनता आखिर कब तक भुगतती रहेगी? सरकार की जिम्मेदारी केवल जांच करवाना नहीं, बल्कि अस्पतालों में पर्याप्त स्टाफ और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करना भी है।उन्होंने कहा कि घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही यह भी जांचा जाए कि कहीं व्यवस्थागत कमियों ने तो स्थिति को गंभीर नहीं बनाया। केवल एक चिकित्सक पर कार्रवाई करके पूरी व्यवस्था की जवाबदेही से बचा नहीं जा सकता।वीरेंद्र कंवर ने प्रदेश सरकार से मांग की कि स्वास्थ्य संस्थानों में रिक्त पदों को समयबद्ध तरीके से भरा जाए तथा प्रसव सेवाओं, आपातकालीन उपचार और आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत किया जाए।उन्होंने कहा कि किसी परिवार की उजड़ी दुनिया को निलंबन का आदेश वापस नहीं लौटा सकता, लेकिन समय रहते स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार करके भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के प्रयास जरूर किए जा सकते हैं। जनता को आश्वासन नहीं, बेहतर और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं चाहिए।































