केंद्रीय वाणिज्य मंत्री व प्रधानमंत्री के नाम नायब तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन

केंद्र सरकार के खिलाफ की जोरदार नारेबाजी, कहा: भारतीय किसानों को बर्बाद करने पर तूली है केंद्र में शासित भाजपा सरकार
करनाल, आशुतोष गौतम (25 अक्तूबर) भारतीय किसान यूनियन के सैंकड़ो कार्यकर्ताओं ने क्षेत्रिय व्यापक, आर्थिक
भागेदारी(आरसीईपी)प्रस्तावित समझौते के विरोध में करनाल की सडकों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने इस दौरान केंद्र में शासित भाजपा सरकार के खिलाफ जोरदार ढंग से नारेबाजी कर रोष जाहिर किया। प्रदर्शन करने के उपरांत लघु सचिवालय पहुंच कर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री व प्रधानमंत्री के नाम नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंप कर भारतीय किसानों के हित में निर्णय लेने की मांग की गई। इससे पूर्व महात्मा गांधी चौंक पर जिलेभर से आए सैंकडो किसानों ने लामबंद्व होकर किसान महापंचायत का आयोजन किया। भाकियू नेताओं ने इस समझौते को लेकर केंद्र सरकार की जमकर आलोचना करते हुए कहा कि सरकार खेती किसानी किसानों को खत्म करने पर तुली हुई है और किसानों का जमकर शोषण किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने आरसीईपी समझौते को लागू करने के साथ किसानों को तबाह करने की तैयारी कर ली है। किसान नेताओं ने एक स्वर में कहा कि क्षेत्रिय व्यापक, आर्थिक भागेदारी(आरसीईपी) को लेकर किए जा रहे केंद्र सरकार के समझौते को किसी भी कीमत पर सहन नही किया जाएगा। चाहे इसके विरोध में किसानों को किसी प्रकार की कुर्बानी क्यों न देनी पड़े। भाकियू नेताओं ने कहा कि सरकार ने किसानों की रायशुमारी के बिना आरसीईपी थोपना चाहती है। इस समझौते के लागू होंने के बाद विदेशी कंपनियों का राज कायम हो जाएगा और किसानों के हाथ में कुछ नही रहेगा। भाकियू नेताओं का कहना है कि जो देश में हमारे डेयरी जैसे क्षेत्र में जो हमारे लाखों सीमांत किसान महिलाओं की आजीविका का जरिया है, वह चौपट हो जाएगा। इसमें बीज कंपनियों को अपने बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा करने के लिए अधिक शक्तियां मिलेंगी। किसान जब अगली फसल या विनियम के लिए बीज बचाएंगे तो इसे अपराध की श्रेणी में माना जाएगा। जो बाते इस समझौते को लेकर सामने आ रही है, इनके आधार पर कहा जा सकता है कि किसान पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा। किसान नेता प्रेम चंद शाहपुर ने कहा कि विश्व में कई देशों में वहां की सरकारों द्वारा किसानों को भारी मात्रा में सब्सिडी दी जाती है। जबकि भारत में उसके एकदम विपरित है। यही कारण है कि भारत का किसान विश्व बाजार में मुकाबला करने में फिलहाल सक्षम नही है। अत: प्रधानमंत्री को देश के किसानों के साथ बैठक करके आरसीईपी के प्रस्तावित समझौते पर बात करनी चाहिए। क्योंकि यह समझौता किसानों के हितों के साथ जुडा हुआ है। इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह घुम्मन, महिला विंग की अध्यक्षा नीलम राणा, प्रदेश संगठन सचिव श्याम सिंह मान, जिलाध्यक्ष यशपाल राणा, जिला महासचिव सतपाल बड़थल, जिला सरंक्षक महताब कादियान, पूर्व जिलाध्यक्ष बाबूराम बड़थल, जिला प्रवक्ता सुरेंद्र सांगवान, जोगिंद्र सिंह झींडा, वासुदेव सचदेवा, धनेतर राणा, रणजीत सिंह जलमाना, विनोद राणा, नेकीराम, रामफल नरवाल, हुकम सिंह दादुपुर, अंग्रेज सिंह, जयपाल शर्मा, दिलावर डबकोली, सतबीर गढ़ी बीरबल, भरतरी मान, जोगिंद्र सांगवान, राजबीर मान, सुरेंद्र सिंह बैनीवाल, भलेराम मान, वेद सांगवान, रणबीर कतलाहेडी सहित काफी संख्या में किसान मौजूद थे।






























