अब करो ना के कारण फैक्ट्रियां बंद होने के कगार पर , जी एस टी रिफंड देरी से आना भी कारण, कराधान फीस कम करना सराहनीय
बददी 3 मई (शांति गौतम) मिनी भारत कहलाने वाले फार्मा हब बीबीएन के बददी में पहले नोटबंदी ने रुलाया था इसके बाद जी एस टी ने उनकी कमर तोड़ दी अब क्रोना महामारी के चलते इंडस्ट्री या बंद होने की कगार पर हैं । फार्मा से जुड़े सुमित सिंगला ने बताया कि देश में पहले इंडस्ट्रीज को नोटबंदी के कारण नुकसान हुआ। उसके बाद जीएसटी ने स्लैब्स के कारण उधमी परेशान हुए । उन्होंने दलील दी है कि विदेश में केवल एक ही तरह का जीएसटी लगता है परंतु भारतवर्ष में कई तरह के स्लैब बनाए गए हैं जिसमें उद्योगपति को मुनाफा कमाना बहुत मुश्किल है तथा उसे जी एस टी रिफंड के लिए कई चक्कर सरकारी कार्यालयों के काटने पड़ते हैं ।उन्होंने बताया कि सरकार पहले तो कच्चे माल पर जीएसटी 18 फीसदी फिर उत्पादन पर 12 प्रतिसत सरकार लगाती है । उसके बाद अन्य 6 फीसदी जी इस टी काफी देरी से उन्हें रिफंड किया जाता है उन्होंने कहा कि यदि सरकारी बैंक का 1 दिन से ज्यादा भी कोई लोन किसत का पैसा अदा न कर पाए तो उनका अकाउंट सिबल खराब व उद्योग एनपीए की कगार पर पहुंच जाते है। परंतु उनका कटा हुआ 6 फीसदी जी एस टी रिफंड उन्हें देरी से देना तर्क संगत नहीं है। उन्होंने बताया है कि क्यों न सरकार दोहरा काम छोड़ केवल एक बार टैक्स बनाए जिससे आबकारी एवं कराधान विभाग का काम भी घटेगा और उद्योगपतियों को सुविधा भी होगी व रिफंड के झंझट से भी निजात मिलेगी। दूसरे पहलू से देखा जाए तो करो ना मामला का क्या अंदेशा कितना बढे यदि सरकार ने टैक्स स्लैब न तोड़ा तो उद्योग अदा न करने के कारण बंद हो जाएंगे तथा बेरोजगारी को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने केंद्रीय राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर को इस बारे भेजे पत्र की प्रतियां दिखाते हुए बताया कि सरकार शीघ्र इस बारे कार्रवाई कर उद्योगपति को राहत दिलाये। उन्होंने कराधान फीस कम करने के निर्णय पर सरकार का आभार जताया। भारत के गुड्स सर्विस टैक्स जी एस टी को विदेशों की तर्ज पर सिंगल विंडो टैक्स किया जाए तथा इसे स्लैब्स जीरो,पांच,बारह अठारह,अठाईस की बजाय एकमुश्त सिंगल विंडो किया जाए।































