बीबीएन 19 सितंबर शांति गौतम
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सोलन द्वारा डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी व वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका विषय पर प्राध्यापकों की एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया| इस संगोष्ठी में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी मुख्य वक्ता रहे| शिक्षकों की भूमिका के विषय में उन्होंने कहा कि आज के दौर में शिक्षकों को अपने राष्ट्र की परिकल्पना स्पष्ट होनी चाहिए। जैसे कई वर्षों से हमको विकृत इतिहास पढ़ाया गया कि आर्य मध्य एशिया से आए| हिसार में हाल ही में हुई राखी गढ़ी के उत्खनन से अब यह एक मिथक साबित हो रहा है। आगे उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध से पूर्व कम्युनिष्टों सहित सभी राजनीतिक दल देश हित के विषय में एक साथ थे। इसलिए राष्ट्र की वस्तुस्थिति पर हमको एकमत होना चाहिए।
डाॅ. मोहन भागवत जी ने फिर कहा कि भारत की विशेषता संतों, महात्माओं द्वारा सदियों के अथक परिश्रम से बनाई एक संस्कृति है, जो पूर्णत: वैज्ञानिक है| विभिन्न पूजा-पद्धतियां होते हुए भी सदियों से अपने देश की एक संस्कृति रही, जो सम्पूर्ण देश को जोड़ती है। इसलिए हमें अपनी संस्कृति का गौरव होना चाहिए। जिस मनुष्य को अपनी संस्कृति और राष्ट्र की पहचान नहीं उसका जीवन व्यर्थ है। अपना राष्ट्र सांस्कृतिक है| राष्ट्र हमको जोड़े रखने के लिए एक अटूट शक्ति है। जीवन में सुख-शांति के विषय में उन्होंने कहा कि अपने अप्रतिम कृर्तत्व से सुख-शांति प्राप्त कर अपना जीवन ठीक करो यह अपनी संस्कृति कहती है। इस प्रकार प्रामाणिकता, नि:स्वार्थ बुद्धि और अपने आचरण के श्रेष्ठ उदाहरण से नई पीढ़ी को तैयार करेंगे तो राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका सार्थक होगी।
इस अवसर पर प्राध्यापकों की ओर से आए एक प्रश्न के उत्तर में डाॅ. मोहन भागवत ने कहा कि टीवी और मीडिया में मनगढ़ंत चरित्र अब युवा पीढ़ी के आदर्श बताए जा रहे हैं। राम के आदर्शों की चर्चा परिवारों में कम हो गई है फिर भी युवा पीढ़ी में कुछ युवा उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। इसलिए हमें भी अपना उत्तम उदाहरण प्रस्तुत करना होगा। आगे उन्होंने ने कहा कि किसान अन्नदाता है, दूसरों के लिए खेती उसका दायित्व बोध रहा, किसानों में इस बोध का अभाव होने लगा है| अब कृषि केवल अधिक से अधिक धन कमाने के लिए की जाने लगी है|किसानों को ऐसे वैज्ञानिक उपाय सुझाने होंगे जिससे वे कम लागत में बेहतर खेती कर सकें। इसके लिए उनकी फसल के संरक्षण के लिए गोदाम बनाना और उनके उत्पादों की बेहतर मार्केट उपलब्ध करवाना व बगीचों के पास माल शीघ्रता से भेजने लिए निकट ही मंड़ियां, लघु उद्योग या बड़ी फैक्ट्री होनी चाहिए। किसानों को प्राकृतिक आपदा की मार से बचाने के लिए सरकार को उचित राहत करने की व्यवस्था व लागत के आधार पर मूल्य तय करना चाहिए। इससे किसान लाभान्वित होगा और किसी अनिष्ट की संभावना समाप्त हो जाएगी।
इस कार्यक्रम में प्रांत संघचालक डॉ. वीर सिंह रांगड़ा, प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, सोलन व हि.प्र. के अन्य विश्वविद्यालयों के कुलपति, प्राध्यापक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र प्रचारक प्रमुख रामेश्वर दास जी, क्षेत्र प्रचारक बनवीर जी, योग भारती के श्रीनिवास मूर्ति जी, क्षेत्र शारीरिक प्रमुख संजीवन कुमार जी, संपर्क प्रमुख श्रीकृष्ण सिंघल जी, प्रांत कार्यवाह किस्मत कुमार जी एवं प्रांत प्रचारक संजय कुमार उल्लेखनीय रूप से उपस्थित रहे|





























