व्यापारियों को इंस्पैक्टरी राज से राहत मिली वहीं व्यापार में प्रतियोगिता के दौर में न्यूनतम लाभ की नीति अपनाने से उपभोक्ताओं को भी फायदा पहुंचा
जसवाल, ऊना ( 19 फरवरी ) हिमाचल प्रदेश व्यापार मंडल ने राज्य सरकार द्वारा मार्जिन आफ प्रोफिट एक्ट 1977 को समाप्त करने के निर्णय को व्यापारी व उपभोक्ता हित में करार दिया है। बुधवार को ऊना में जारी एक वक्तव्य में हिमाचल प्रदेश व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष सोमेश शर्मा ने कहा कि इस एक्ट को बंद करके सरकार ने सकारात्मक पहल की है। इससे जहां व्यापारियों को इंस्पैक्टरी राज से राहत मिली है,वहीं व्यापार में प्रतियोगिता के दौर में न्यूनतम लाभ की नीति अपनाने के चलते उपभोक्ताओं को भी फायदा पहुंचा है। सोमेश शर्मा ने बताया कि मार्जिन आफ प्रोफिट एक्ट 1977 कानून देश भर में सिर्फ हिमाचल प्रदेश में ही लागू था। जिससे व्यापारियों को परेशानी उठानी पड़ रही थी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सभी पक्षों को ध्यान में रखकर इस कानून को हटाने का निर्णय लिया,जिसका व्यापक स्वागत हुआ था। उन्होंने कहा कि अब कुछेक संगठन बिना किसी ठोस कारण के इस कानून को फिर से लागू करने की मांग उठा रहे है,जबकि यह कानून सरकार ने सभी पहलूओं को ध्यान में रखकर ही वापिस लिया था। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक छोटा पहाड़ी राज्य है। यहां सभी सामाान बाहरी राज्यों से ही आता है। प्रदेश की आर्थिकी को मजबूत करनेे के लिए व्यापारी भी अहम भूमिका निभा रहे है। प्रदेश में जमाखोरी व मुनाफाखोरी का प्रश्न ही पैदा नही होता है। हिमाचल में न तो कोई ऐसा व्यापारी है,जोकि किसी उत्पाद विशेष का स्टाक करके उसकी कीमतों को प्रभावित करे, न ही व्यापारी अनावश्यक लाभ अर्जित कर रहे है। उन्होंने कहा कि पंजाब व हरियाणा राज्यों के साथ प्रदेश की सीमाएं लगने के कारण हिमाचल प्रदेश का व्यापारी पहले ही दबाव में है। पंजाब व हरियाणा में कई चीजों के दाम हिमाचल से बहुत सस्ते में उपलब्ध है,जिसके कारण प्रदेश के व्यापारी न्यूनतम लाभ अर्जित कर अपनी दुकानदारी को बचाते हुए केवल मात्र जनसेवा करके अपने परिवार पाल रहे है। उन्होंने कहा कि प्रदेश का व्यापारी न केवल राज्य के उत्थान में अपनी सकारात्मक भूमिका निभा रहा है,बल्कि एक पर्यटक राज्य होने के नाते पुरे देश भर से आने वाले सैलानियों के समक्ष भी प्रदेश की बेहतर छवि को पेश करने में मददगार साबित हो रहा है। सोमेश शर्मा ने राज्य सरकार से मांग की है कि किसी भी तथाकथित संगठन की मांग पर राज्य के व्यापारियों व जनता के हितों के विरूद कोई निर्णय न ले। उन्होंने प्रदेश के आगामी बजट में भी व्यापारी हितों की रक्षा करने व व्यापारियों के कल्याण के लिए प्रावधान किए जाने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रस्तावित बजट में व्यापारी कल्याण बोर्ड के गठन का भी प्रावधान करें।






























